देश भर में पेट्रोल – डीजल की कीमतों में केंद्र सरकार द्वारा जो मामूली गिरावट की गई है उसको लेकर राजनीतिक गलियारों में उतनी ही मामूली हलचल देखने को मिल रही है। अधिकाँश विपक्षी राजनीतिक दल पेट्रोल पर एक्साइज में की गई 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये की कमी को ‘cosmetic correction’ का नाम दे रहे हैं और इस दीपावली पर दी गई
तात्कालिक राहत को बेहद मामूली करार दे रहे हैं।
जनता में भी सरकार के इस कदम का वैसा उत्साहपूर्ण स्वागत नहीं हुआ जैसी उम्मीद की जा रही थी क्योंकि जनता इस कदम को सरकार की संवेदनशीलता से जोड़कर नहीं, पांच राज्यों – गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश में जल्दी ही होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देख रही है।
सामजिक कार्यकर्त्ता दीप शर्मा के अनुसार पिछले काफी समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से जनता की ज़िंदगी मुश्किल हो गयी थी लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वह ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर संवेदनशील है और इन्हें कम करने पर विचार कर रही है। सरकार का यह फैसला 29 विधानसभा सीटों और 3 लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनावों और उनमें भाजपा की करारी हार और कांग्रेस के लिए आये उत्साहवर्धक नतीजों के बाद आया है। स्वाभाविक है कि इससे जनता के बीच यह सन्देश गया है कि भाजपा पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों पर पेट्रोल – डीजल की कीमतों के पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है और तजा फैसला इसी चुनावी चिंता से उपजा है। इसका मतलब यह माना जा रहा है कि इन राज्यों में चुनाव सम्पन्न होते ही पेट्रोल – डीजल के दाम फिर ऊपर का रुख कर लेंगे।
भारतीय मुस्लिम विकास परिषद् के अध्यक्ष समी आगाई का कहना था कि पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में जो कटौती हुए है वह बहुत कम है। 2021 की बात करें तो साल के शुरू से अब तक पेट्रोल और डीजल के भाव लगभग 28 रुपये और 26 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये जा चुके हैं। इस मुकाबले 5 और 10 रुपये की कटौती को रहत मानना बेमानी है, खासकर तब, जब इस महंगाई में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों से ज्यादा बड़ी भूमिका एक्साइज ड्यूटी की है।
आगाई ने बताया कि ताजा कटौती के बाद भी पेट्रोल पर 27.90 रुपये और डीजल पर 21.80 रुपये पति लेटर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जो पिछली सरकारों के मुकाबले काफी ज्यादा है। पेट्रोल और डीजल के ऊँचे भाव केवल शहरी वाहन धारकों को ही प्रभावित नहीं करते हैं, बल्कि फसलों की सिंचाई और माल धुलाई का खर्च बढ़ाकर आम तौर पर महंगाई का स्तर बढ़ा देते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सरकार पेट्रोल – डीजल के दामों में और कमी लाने पर विचार करे, क्योंकि विपक्ष इसी मूलयवृद्धि और महंगाई को ही चुनावी मुद्दा बनाएगी।

