शहर में एक साथ चल रहे मेट्रो निर्माण, सीएम ग्रिड (CM Grid) सड़क सुधार कार्य और नमामि गंगे परियोजना के तहत सीवर एवं पाइपलाइन बिछाने के कार्यों ने आम नागरिकों के साथ-साथ पर्यटन उद्योग की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जगह-जगह खुदाई, बैरिकेडिंग, संकरी होती सड़कें और भारी निर्माण गतिविधियों के कारण शहर के अधिकांश प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। सबसे अधिक परेशानी इस समय एमजी रोड स्थित रावली रेलवे ओवरब्रिज पर देखने को मिल रही है, जहां आगरा मेट्रो के पिलर निर्माण के लिए की गई बैरिकेडिंग के चलते अगले लगभग 25 दिनों तक लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ेगा। स्कूल खुलने के बाद सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ गई है, जिससे सुबह और शाम के व्यस्त समय में जाम की स्थिति और गंभीर हो गई है।
आगरा कैंट से भगवान टॉकीज होते हुए कालिंदी विहार तक बनाए जा रहे आगरा मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर का निर्माण कार्य एमजी रोड पर अंतिम चरणों में पहुंच रहा है। अधिकांश स्थानों पर मेट्रो पिलर तैयार हो चुके हैं, लेकिन रावली पुल, कलेक्ट्रेट, धाकरान चौराहा और हरीपर्वत जैसे कुछ संवेदनशील स्थानों पर अभी पिलर निर्माण जारी है। इन स्थानों पर सड़क के बीचों-बीच बैरिकेडिंग कर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे यातायात के लिए उपलब्ध सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। रावली पुल पर स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है, जहां कलेक्ट्रेट से एसबीआई तिराहे की ओर जाने वाली लेन का बड़ा हिस्सा बैरिकेडिंग के कारण घिर गया है। ऐसे में जब सिटी बस या अन्य बड़े वाहन पुल से गुजरते हैं तो पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और कुछ ही मिनटों में जाम कई सौ मीटर तक फैल जाता है।
शहर में स्कूल खुलने के साथ ही स्कूली बसों, वैन, ऑटो और निजी वाहनों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। एमजी रोड पर पहले से संचालित सिटी बसों और भारी वाहनों के साथ इन अतिरिक्त वाहनों का दबाव पड़ने से सुबह और शाम के समय यातायात व्यवस्था चरमरा रही है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहने के बावजूद सीमित सड़क और लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण जाम पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रहा है।
यातायात पुलिस के अनुसार आगरा मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) को लगभग एक माह की अनुमति दी गई है, जिसमें से कुछ दिन बीत चुके हैं। निर्माण कार्य पूरा होने तक वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पीक आवर्स में ट्रैफिक डायवर्जन के माध्यम से वाहनों का दबाव कम करने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों के समय में बदलाव को लेकर भी विद्यालय प्रबंधन से बातचीत की जाएगी, ताकि एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक दबाव न बने।
शहर की यातायात समस्या केवल रावली पुल तक सीमित नहीं है। सीएम ग्रिड योजना के तहत प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण का कार्य, नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत सीवर और पाइपलाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई तथा मेट्रो निर्माण के समानांतर चलने से आगरा के अनेक हिस्सों में रोजाना जाम की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें महीनों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इन सबके बीच सबसे अधिक चिंता का विषय फतेहाबाद रोड है, जो ताजमहल, होटल क्षेत्र और शहर के पर्यटन उद्योग की जीवनरेखा मानी जाती है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यह मार्ग विभिन्न निर्माण कार्यों के कारण लगातार खुदाईग्रस्त है। जगह-जगह बैरिकेडिंग, अधूरी सड़कें, धूल, संकरी लेन और धीमी गति से चल रहे कार्यों के कारण यहां प्रतिदिन लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। यही मार्ग ताजमहल, शिल्पग्राम, पांच सितारा होटलों, प्रमुख रिसॉर्ट्स और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है। ऐसे में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है, जिससे उनके यात्रा अनुभव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल संचालकों, ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटरों और टैक्सी संचालकों का कहना है कि लगातार जाम के कारण पर्यटकों के कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। कई बार पर्यटक निर्धारित समय पर ताजमहल या अन्य स्मारकों तक नहीं पहुंच पाते, जबकि कुछ विदेशी पर्यटक शहर की अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को लेकर असंतोष भी व्यक्त करते हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी होने के बावजूद यदि प्रमुख पर्यटन मार्ग लंबे समय तक खुदाई और जाम से प्रभावित रहेंगे तो इसका सीधा असर आगरा की छवि और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
शहर में लगातार बढ़ते जाम को देखते हुए प्रशासन ने प्रमुख नौ चौराहों को विशेष निगरानी क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है। इन चौराहों के आसपास 50 मीटर के दायरे को नो पार्किंग और नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया है। संबंधित पुलिस चौकियों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा और विशेष रूप से स्कूलों की छुट्टी के समय ट्रैफिक प्रबंधन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था रहेगी। नगर निगम को प्रमुख चौराहों पर दिशा-सूचक संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि एमजी रोड पर यातायात पुलिसकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।
आगरा मेट्रो परियोजना उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित की जा रही एक महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन परियोजना है, जिसका उद्देश्य ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन, भगवान टॉकीज, कालिंदी विहार तथा अन्य प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और पर्यटन क्षेत्रों को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है। परियोजना के तहत दो मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। पहला कॉरिडोर ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा तक लगभग 14 किलोमीटर लंबा है, जिसमें एलिवेटेड और भूमिगत दोनों सेक्शन शामिल हैं। दूसरा कॉरिडोर लगभग 16 किलोमीटर लंबा है, जो आगरा कैंट से भगवान टॉकीज, एमजी रोड, रावली पुल होते हुए कालिंदी विहार तक पूरी तरह एलिवेटेड बनाया जा रहा है। रावली पुल पर चल रहा पिलर निर्माण इसी कॉरिडोर का हिस्सा है।
आगरा मेट्रो के प्राथमिक सेक्शन पर यात्री सेवाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं और प्रतिदिन हजारों लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। शेष दोनों कॉरिडोरों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर में सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा मिलने, निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने, ट्रैफिक दबाव घटने और पर्यटन को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि वर्तमान स्थिति में शहरवासी और पर्यटक विकास कार्यों की कीमत रोजाना जाम, धूल, धीमी आवाजाही और अव्यवस्थित यातायात के रूप में चुका रहे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ चल रहे निर्माण कार्यों के बेहतर समन्वय, समयबद्ध निष्पादन और प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन की मांग लगातार तेज होती जा रही है, ताकि विकास कार्यों की गति भी बनी रहे और जनजीवन तथा पर्यटन उद्योग पर उसका प्रतिकूल प्रभाव न्यूनतम हो।


