विगत दिवस फर्रुखाबाद जेल में कैदियों द्वारा उपद्रव में जेलर सहित 30 पुलिसकर्मियों के घायल तथा एक बंदी की मौत होने के बाद आगरा की सेंट्रल और जिला जेल में भी अलर्ट कर जारी कर दिया गया है तथा दोनों जेलों में कड़ी सुरक्षा कर दी गयी है। CCTV कैमरों एवं अन्य सभी उपकरणों से जेलों की गतिविधियों पर नजर राखी जा रही है। बैरकों की तलाशी कराइ गई है। शासन से जेल अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि रविवार को फर्रुखाबाद जेल में एक बंदी की मौत के बाद हुए बवाल की तरह प्रदेश की अन्य जेलों में भी कोई घटना न होने पाए।
आगरा की जिला जेल में वर्तमान में लगभग 3 हजार से ज्यादा बंदी हैं जबकि सेंट्रल जेल में कश्मीर से लाये गए बंदियों सहित 1780 बंदी हैं। जिला जेल अधीक्षक पी डी सलोनियाँ के मुताबिक़ जेल में सघन तलाशी कराइ जा रही है। संवेदनशीलता को देखते हुए बंदियों और मुलाकातियों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है तथा CCTV कैमरों द्वारा पूरी तरह निगरानी रखी जा रही है।
DIG जेल वी के सिंह का कहना है की आगरा परिक्षेत्र की सभी जेलों में फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जिला जेल की घटना को दृष्टिगत रखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है। जेलों में बंदियों को विशेष निगरानी में रखा जा रहा है और जेल अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

कांग्रेस के शहर अध्यक्ष देवेंद्र कुमार चिल्लू ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के शासनकाल में जेलों में बंद लोगों के साथ-साथ जेल स्टाफ भी अब सुरक्षित नहीं है। फर्रुखाबाद जेल में हुए उपद्रव का उदाहरण देते हुए चिल्लू ने बताया कि बंदी की मौत के बाद अगर वहां की जेल का स्टाफ सतर्कता बरतता तो जेलर शैलेश कुमार सोनकर और बंदीरक्षकों पर बंदियों द्वारा पथराव नहीं किया जाता तथा बैरकों को आग के हवाले नहीं किया जाता जिसमें दो दर्जन से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए।
सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय के अनुसार डेंगू बीमारी से पीड़ित बंदी शिवम् को अगर उचित इलाज मिल जाता तो शायद उसे मरने से बचाया जा सकता था। शिवम् दहेज़ के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उपाध्याय ने बताया कि फतेहगढ़ के जिलाधिकारी संजय कुमार का यह कहना कि जेल में हुए उपद्रव की एक कमेटी बनाकर जांच कराई जायेगी और दोषियों पर कानूनी कार्यवाही की जायेगी, काफी नहीं है। आज जरूरत है कि जेलों के स्टाफ को मानवीयता और संवेदनशीलता में प्रशिक्षित किया जाए ताकि उनके असंवेदनशील व्यवहार से बेवजह बंदियों को होने वाली प्रताड़ना से बचा जा सके।
हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा का कहना था कि वर्तमान में आगरा की सेंट्रल जेल में 75 कश्मीरी कैदी बंद हैं, जिनमें से अधिकतर कश्मीर में लागू पब्लिक सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तार किये गए हैं। वैसे तो इन्हें पहले से ही विशेष बैरकों में रखा गया है, लेकिन फिर भी इन कैदियों पर विशेष निगाह रखने की आवश्यकता है।

