अयोध्या के राम मंदिर के बाद राज्य सरकार का पूरा फोकस अब मथुरा नगरी पर लग गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछली बार जब मथुरा आये थे तो यहाँ के संतों ने मथुरा नगरी को तीर्थस्थल घोषित करने तथा मांस और शराब की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की थी।
सूत्रों के अनुसार वह मांग आज उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई है और मथुरा / वृन्दावन में मांस और शराब की बिक्री पर नगर निगम की 10 किमी परिधि में स्थित 22 वार्डों में तीर्थ स्थल घोषित करते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट करके दी है।
इससे पहले सरकार ने ब्रज क्षेत्र के गोवर्धन – बरसाना – नन्दगांव – राधाकुंड – वृन्दावन – गोकुल और बलदेव को तीर्थ स्थल घोषित कर वहां मांस / मछली और शराब की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया था। इन सात स्थानों सहित मथुरा – वृन्दावन के 22 वार्डों में ही भगवान कृष्ण और राधा रानी से जुड़े अधिकांश मंदिर हैं।
वृन्दावन के एक संत ने बताया की मथुरा भगवान् कृष्ण की जन्म स्थली है और वृन्दावन उनकी क्रीड़ा स्थली है। इनके आध्यात्मिक और धार्मिक महत्त्व के कारण देश – विदेश के लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं। दोनों स्थलों का पौराणिक महत्त्व के साथ – साथ पर्यटन की दृष्टी से भी बहुत महत्त्व है। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने मांस – शराब की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है। एक अन्य संत ने बताया की तीन साल की लम्बी प्रतीक्षा के बाद मुक्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहाँ के संतों की इच्छा पूरी की है।

मथुरा निवासी एवं उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री का फैसला मथुरा निवासियों की लम्बी समय से चली आ रही मांग को पूरी करने के लिए लिया गया है। उत्तर प्रदेश की सरकार ब्रज क्षेत्र को प्राथमिकता मानकर काम कर रही है। साढ़े चार साल में यहाँ किये गए विकास कार्य इसका उदाहरण हैं। शर्मा का कगना था कि ब्रज की पवित्र भूमि को दुनिया को सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना है जिससे ब्रज के लोगों को भरपूर रोजगार मिल सकेगा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस विषय पर जनहित याचिका दायर करने वाले हिंदूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि सन 1998 में श्री माथुर चतुर्वेदी परिषद् के माध्यम से दायर जनहित याचिका से शुरू हुई यह मुहिम आज एक लक्ष्य को पाने में सफल हो गई है। मैंने स्वयं कोर्ट के सामने हलफनामा दिया था कि यमुना में प्रदूषण के कारणों में जहरीले रसायन उगलने वाले उद्योगों के साथ अवैध पशु कटान भी है, जिसका खून शहर की नालियों से बहकर यमुना में आता है। आख़िरकार 15 जुलाई 1998 को अवैध कट्टीघर बंद कराये गए लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान अवैध कटान बंद होने के बावजूद श्री कृष्ण जन्मस्थल के आस – पास दुकानों पर मांस बिकने लगा था। इसी तरह शराब की दुकानें भी जन्मस्थल के आस – पास बढ़ गयीं। मुख्यमंत्री जी के इस आदेश के लिए ब्रजवासी बधाई के पात्र हैं।
कान्हा की नगरी मथुरा के तीर्थ क्षेत्र का दायरा और बढ़ा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से दस वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र तीर्थस्थल, मांस और शराब बिक्री पर रोक pic.twitter.com/rPvYCd3W23
— Government of UP (@UPGovt) September 11, 2021
भगवान् कृष्ण की जन्मस्थली को धार्मिक तीर्थस्थल घोषित करने का स्वागत करते हुए द्वारकाधीश मंदिर के वरिष्ठ अधिकारी लक्ष्मण पाठक ने कहा कि अभी भी हमारी कोशिश रहेगी कि सम्पूर्ण मथुरा जिले को तीर्थस्थल घोषित किया जाए तथा पूरे मथुरा जिले में मांस और मदिरा पर पाबंदी लगाईं जाए जिससे तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा न हो।
आदेश जारी होते ही मथुरा के अधिकारियों ने शहर के 22 वार्डों में तथा श्री कृष्ण जन्मस्थल से 10 किमी की परिधि में तेजी से कार्य करना शुरू कर दिया है। जिलास्तर पर सभी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
हालांकि मथुरा का मुस्लिम समुदाय इस निर्णय से खुश नहीं है। मथुरा के सामाजिक कार्यकर्ता मो0 आरिफ का कहना था कि शराब का सेवन इस्लाम में भी हराम है लेकिन अगर नशे पर प्रतिबन्ध लगाया ही जाना है तो भांग पर भी लगाया जाए, केवल शराब पर ही नहीं। साथ ही, हिन्दू धर्मस्थलों से दूर मांस की दुकानों को उचित साफ – सफाई के साथ खोले जाने की अनुमति दी जा सकती है ताकि किसी की धार्मिक मान्यताओं को ठेस भी न पहुंचे और मांसाहार करने वालों को उचित दर पर मांस भी उपलब्ध हो सके।

