
दो दिनों की राहत के बाद कोरोना (corona) ने एक बार फ़िर आगरा में दस्तक दे दी है। गुरुवार को एक मरीज मिलने के बाद जिले में सक्रिय मरीजों का आंकड़ा फ़िर पाँच तक पहुँच गया है जिसके बाद प्रशासन ने जिले में लागू रात्रि कर्फ्यू में सख्ती बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में लगातार मिल रहे वायरल बुखार के मरीजों के बीच कोरोना (corona) के मरीजों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि यह बुखार भी काफी हद तक कोरोना (corona) जैसे ही लक्षण दे रहा है और 10 से 12 दिन तक लक्षण रह रहे हैं। सूत्रों ने बताया है कि गुरुवार को कोरोना जैसे लक्षणों वाले लगभग 40 मरीजों की कोरोना जांच कराई गई थी लेकिन किसी को भी कोरोना नहीं था। इन परस्थितियों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि किसी भी प्रकार का खांसी-जुकाम आदि होने पर मरीज घर में भी मास्क लगाकर ही रहें।
जिला प्रशासन के अनुसार अब तक 15.58 लाख लोगों की जाँचें की गई हैं और 25,741 मरीज मिले हैं जिनमें से 25,278 मरीज ठीक हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों में कुल 458 मौतें दर्ज हैं। फिलहाल आगरा में कोरोना (corona) संक्रमण दर 1.65 पर स्थिर है लेकिन दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों से लगती हुई सीमा के कारण आगरा में दोबारा कोरोना फैलने का खतरा बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में साप्ताहिक बंदी खत्म हो जाने के बाद आगरा के बाजारों में लापरवाही का आलम है। बिना मास्क के खरीदारों की भीड़ शहर के सभी बाजारों में देखने को मिल रही है और सेनिटाईजर का इस्तेमाल होता नजर नहीं आ रहा।

सड़क पर खाने-पीने के खोमचे एक बार फ़िर गुलजार हैं हालांकि इन पर भी किसी प्रकार के कोविड नियमों का पालन नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर जिले में स्थिति एक बार फ़िर विस्फोटक रूप इख्तियार करती नजर आ रही है लेकिन आम आबादी को इससे कोई फ़र्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है।
हालांकि अब आगरा जिला अस्पताल में बिना मास्क किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जिला अस्पताल प्रशासन ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों से शारीरिक दूरी और मास्क के नियम का सख्ती से पालन कराया जाए। स्टाफ को भी निर्देश दिए गए हैं कि बिना मास्क के अस्पताल में प्रवेश न करें, और अस्पताल परिसर में पूरा समय मास्क लगाए रखें।
उधर स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार शुक्रवार को 82,000 लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा था जिसके लिए 426 बूथों पर टीके लगाए जाने की व्यवस्था की गई थी। इससे पहले अधिकतम 60,000 लोगों को ही टीके लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया था।


