
केंद्र सरकार की ओर से आम नागरिकों, छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को आसान बैंक ऋण उपलब्ध कराने की नीति के बीच बैंकिंग व्यवस्था में भ्रष्टाचार की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आगरा जिले की पंजाब नेशनल बैंक की भद्रौली शाखा, बरहन के शाखा प्रबंधक को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी बैंक प्रबंधक पर आरोप है कि उसने सोलर पैनल ऋण की स्वीकृत हो चुकी फाइलों को आगे बढ़ाने और प्रक्रिया पूरी करने के लिए अवैध धन की मांग की। सीबीआई ने शिकायत के आधार पर 25 जून 2026 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी में कार्यरत है। आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने लगभग 19 सोलर पैनल ऋण फाइलों के निस्तारण के लिए प्रति फाइल 7 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इन ऋण फाइलों को बैंक की ओर से पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी थी, लेकिन आरोप के अनुसार अंतिम प्रक्रिया पूरी करने के लिए रिश्वत की मांग की गई।
बाद में बातचीत के बाद कथित रूप से 19 ऋण फाइलों के लिए कुल 52 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और बैंक प्रबंधक को 30 हजार रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
सीबीआई ने आरोपी को 25 जून को गिरफ्तार किया। उसे 26 जून को गाजियाबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा। मामले की जांच अभी जारी है।
*आसान ऋण व्यवस्था के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई जरूरी: सिराज कुरैशी*
इस मामले पर सिराज कुरैशी, चेयरमैन, ऑल इंडिया हिंदुस्तानी बिरादरी ने कहा कि भ्रष्टाचार की ऐसी घटनाएं न केवल आम लोगों को परेशान करती हैं, बल्कि सरकार की उन नीतियों को भी कमजोर करती हैं जिनका उद्देश्य लोगों तक वित्तीय सुविधाएं आसानी से पहुंचाना है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि आम आदमी, छोटे व्यवसायी और जरूरतमंद लोग बिना अनावश्यक बाधाओं के बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकें और उन्हें आसान वित्तीय सहायता मिल सके। लेकिन जब कुछ सरकारी कर्मचारी या अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को सेवा के बजाय कमाई का माध्यम बना लेते हैं, तो वे इन अच्छी नीतियों को नुकसान पहुंचाते हैं।”
कुरैशी ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है क्योंकि ऋण सुविधा किसी व्यक्ति के रोजगार, व्यवसाय और भविष्य से जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी द्वारा स्वीकृत ऋण को रोककर या प्रक्रिया में देरी कर रिश्वत मांगना उन लोगों के साथ अन्याय है जो सरकारी वित्तीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहते हैं।
उन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई से ही जनता का विश्वास मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ईमानदार बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी संख्या के बावजूद कुछ लोगों के कारण पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

