आगरा के थाना जैतपुर क्षेत्र के धायपुर गाँव में शिक्षकों द्वारा तथाकथित रूप से छात्र की पिटाई (agra student beaten) करने और उसको गंभीर रूप से घायल कर देने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शहर में हड़कंप मचा हुआ है। यह घटना आजमगढ़ के एक निजी स्कूल में एक छात्रा श्रेया तिवारी द्वारा शिक्षकों और प्रधानाध्यापक द्वारा कथित दुर्व्यवहार के बाद की गई आत्महत्या के बाद शिक्षक और प्रधानाध्यापक की गिरफ्तारी के विरोध में आगरा के निजी स्कूलों द्वारा की गई हड़ताल से एक दिन पहले ही सोमवार को हुई।
सूत्रों ने बताया है कि धारपुर गाँव में स्थित एसके मेमोरियल स्कूल में यूनिफ़ॉर्म के जूते पहनकर न आने पर शिक्षकों ने छात्र सुरजीत की पिटाई (agra student beaten) कर दी। पिटाई से छात्र की हालत बिगड़ गई जिसके बाद उसको परिजन आगरा ले आये। चित्राहाट के पुराचतुर्भुज गाँव के धर्मवीर सिंह का बेटा सुरजीत 11 वीं का छात्र है। सुरजीत के भाई शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि सोमवार को प्रार्थना सभा में ड्रेस के जूते पहनकर न आने पर शिक्षकों ने अगल खड़ा कर दिया। जूते भीग जाने की बात कहे जाने पर शिक्षकों ने थप्पड़ मारे। स्कूल से बाहर निकालकर भी पिटाई की।
छात्र की पिटाई की तस्वीरें मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। स्कूल के डायरेक्टर आलोक पांडेय ने बताया कि छात्र को यूनिफ़ॉर्म पहनकर न आने पर शिक्षकों ने प्रार्थना सभा की लाइन से अलग खड़े होने के लिए कहा था। छात्र ने अभद्रता की तो शिक्षकों ने थप्पड़ मार दिए थे (agra student beaten)। छात्र के माता-पिता को बुलवाया था, जो बातचीत से संतुष्ट थे। उन्हें छात्र के इलाज का खर्च उठाने का भरोसा दिया था। जैतपुर थानाध्यक्ष ईश्वर सिंह तोमर का कहना है कि मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। अब प्रकरण का पता चला है। जाँच कराई जाएगी।
मंगलवार को घायल छात्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावक काफी आक्रोश में दिखे। उनका कहना था कि शिक्षा का अधिकार कानून आने के बाद शिक्षक छात्रों पर हाथ नहीं उठा सकते हैं, लेकिन आये दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें शिक्षकों द्वारा छात्र को सहपाठियों के सामने इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने आत्महत्या तक कर ली।
आजमगढ़ की घटना के बाद हुई शिक्षक और प्रधानाध्यापक की गिरफ्तारी के विरोध में आगरा के निजी स्कूलों द्वारा की गई हड़ताल को दबाव की रणनीति बताते हुए अभिभावकों ने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि क्लासरूम सहित स्कूलों का चप्पा-चप्पा सीसीटीवी की निगरानी में हो जिससे छात्रों के प्रति शिक्षकों द्वारा किए जा रहे दुर्व्यवहार का सबूत मिल सके, क्योंकि स्कूल प्रबंधन हमेशा ख़ुद को बचाने के लिए अपने स्टाफ़ की हिमायत लेगा, और छात्र डर की वजह से शिक्षक के ख़िलाफ़ गवाही नहीं देंगे।

