विख्यात संत गुरु तेग बहादुर (Guru Teg Bahadur) की 400वीं जयंती पर 21 अप्रैल (बृहस्पतिवार) को सूर्यास्त के बाद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को सम्बोधित करने वाले पहले प्रधानमन्त्री साबित होंगे।
इस सन्दर्भ में वरिष्ठ नागरिक उमा शंकर शर्मा का यह कहना उचित लगा कि मुगलकालीन लाल किले से आजादी के बाद से प्रतिवर्ष 15 अगस्त को प्रातः देश के प्रत्येक प्रधानमन्त्री ने सम्बोधन किया है लेकिन वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी इस बार सूर्यास्त के बाद सम्बोधन करके एक नई परंपरा शुरू करने जा रहे हैं, जो कि एक सराहनीय कदम साबित हो सकता है।
इसी सन्दर्भ में 106 वर्षीय इमामुद्दीन कुरैशी ने बताया कि सन 47 के बाद से मैं हर प्रधानमन्त्री द्वारा लाल किले से दिए गए सम्बोधन को सुनता चला आ रहा हूँ, लेकिन मेरे जीवनकाल में मोदी पहले प्रधानमन्त्री होंगे जो गुरु तेगबहादुर (Guru Teg Bahadur) की 400वीं जयंती के मौके पर सूर्यास्त के बाद लाल किले से कोई सम्बोधन देंगे।
हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा ने देश के संस्कृति मंत्रालय के इस कदम की सराहना करते हुए बताया कि मंत्रालय ने गुरु तेग बहादुर की जयन्ती के लिए लाल किले को शायद इसलिए चुना है क्योंकि यहीं से 1675 में मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर (Guru Teg Bahadur) की हत्या का फरमान जारी किया था। स्वतंत्रता दिवस के अलावा यह दूसरा मौक़ा होगा जब प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी लाल किले से जनता को सम्बोधित करेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सन 2018 में मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा आजाद हिन्द सरकार के गठन की 75वीं वर्षगाँठ पर लाल किले से राष्ट्रध्वज प्रातःकाल 9 बजे लहराया था।
इस सन्दर्भ में जब आम जनता की राय जानी गई तो हर वर्ग के लोगों ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के सूर्यास्त के बाद लाल किले से सम्बोधन को स्वीकृति देकर इस कदम की मुक्त कंठ से तारीफ़ की।

