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आगरा को विरासत नगर घोषित करने के साथ यमुना पुनर्जीवन को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य

Dr. Devashish Bhattacharya, River Connect Campaign

Dr. Devashish Bhattacharya, River Connect Campaignआगरा को आधिकारिक रूप से “विरासत नगर” घोषित करने की मांग अब केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह शहर के पर्यावरणीय भविष्य और जल सुरक्षा से भी जुड़ गई है। रिवर कनेक्ट अभियान के प्रतिनिधि एवं पर्यावरणविद् डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात को ज्ञापन सौंपकर आगरा को “विरासत नगर” घोषित किए जाने तथा इसे यूनेस्को के विश्व धरोहर शहर का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि आगरा केवल ताजमहल का शहर नहीं है, बल्कि यह भारत की बहुस्तरीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, स्थापत्य और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत केंद्र है। शहर की पहचान उसके स्मारकों के साथ-साथ यमुना नदी से भी जुड़ी हुई है, जिसने सदियों तक आगरा की सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को जीवन दिया।

प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बताते हुए पर्यटन विभाग के महानिदेशक वेदपति मिश्र को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव पर विचार कर इसे मुख्यमंत्री के समक्ष भेजा जाएगा।

डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि विरासत संरक्षण केवल स्मारकों की मरम्मत तक सीमित नहीं हो सकता। यदि यमुना नदी निरंतर प्रदूषित और अविरल प्रवाह से वंचित रही, तो आगरा की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत दोनों गंभीर संकट में पड़ जाएंगी। उन्होंने यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) सुनिश्चित करने, बैराजों के संचालन की वैज्ञानिक समीक्षा, प्रदूषण नियंत्रण तथा नदी के समग्र पुनर्जीवन के लिए विशेष कार्ययोजना लागू करने की मांग की।

उन्होंने हाल में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना है कि विश्व भर में बढ़ती भीषण गर्मी और असामान्य मौसमीय परिस्थितियों का असर अब जैव विविधता पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में बढ़े तापमान के कारण सूर सरोवर और आसपास के आर्द्र क्षेत्रों में आने वाले प्रवासी पक्षियों की वापसी सामान्य से देर में दर्ज की गई है, जिसे विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन और एल-नीनो के प्रभाव से जोड़ रहे हैं।

डॉ. भट्टाचार्य ने कहा कि यदि वैज्ञानिकों की आशंका के अनुरूप सुपर एल-नीनो जैसी परिस्थितियां अपेक्षा से अधिक समय तक बनी रहती हैं, तो उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में वर्षा चक्र, भूजल पुनर्भरण और नदी प्रवाह पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे परिदृश्य में आगरा को भविष्य के संभावित सूखा-संकट के लिए अभी से तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि यमुना का पुनर्जीवन केवल पर्यावरणीय परियोजना नहीं, बल्कि शहर की जल सुरक्षा, पर्यटन, कृषि, जैव विविधता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा दीर्घकालिक निवेश है।

उन्होंने बताया कि रिवर कनेक्ट अभियान पिछले कई वर्षों से यमुना के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए जनजागरूकता, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रशासनिक संवाद तथा नीति-स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है। अभियान की प्रमुख मांगों में यमुना में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित करना, नदी तटों का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, आर्द्रभूमियों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण तथा नदी आधारित शहरी नियोजन को नीति का हिस्सा बनाना शामिल है। उनका कहना है कि यदि अभी समन्वित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।

रिवर कनेक्ट अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में कहा गया कि आगरा की पहचान केवल विश्वविख्यात स्मारकों से नहीं, बल्कि उसकी जीवंत नदी संस्कृति, बहुलतावादी विरासत और ऐतिहासिक शहरी परंपरा से भी निर्मित होती है। इसलिए शहर को “विरासत नगर” का दर्जा देने के साथ-साथ यमुना संरक्षण को उस नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि आगरा अपनी सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी प्रभावी ढंग से सामना कर सके।