आगरा की थाना हरीपर्वत पुलिस द्वारा आज कुछ वकीलों द्वारा निर्दोषों का झूठे मुकदमों में फंसाकर पैसे ऐंठने के लिए चलाए जा रहे एक अवैध वसूली रैकिट का भंडाफोड़ किया गया जिसमें 3 वकीलों और एक महिला समेत 4 अभियुक्तों को गिरफ़्तार (lawyers arrested) किया गया है और 2 वकीलों की तलाश जारी है। इन अभियुक्तों के क़ब्ज़े से 3 लाख 75 हज़ार रुपए भी बरामद किए गए हैं।
थाना प्रभारी हरीपर्वत अरविंद कुमार ने बताया है कि एक महिला अंजलि ने 24 जून को थाना हरीपर्वत में तहरीर दी थी कि 26 अप्रैल को उसका परिचित राहुल अपने जन्मदिन की पार्टी बताकर उसे एक होटल में ले गया और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुराचार किया तथा उसके फ़ोटो और विडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी। अंजलि के अनुसार जब उसके राहुल के परिजनों से शिकायत की तो राहुल की माँ, पिता, मामा, दादा व 5-6 अज्ञात लोगों ने रास्ते में रोककर उसको जान से मारने की धमकी दी।
थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि इस मामले में तुरंत बलात्कार व अन्य धाराओं में मुक़दमा किया गया लेकिन जब पुलिस टीम द्वारा सर्विलांस आदि माध्यमों से विवेचना की गई तो घटना पूरी तरह फ़र्ज़ी पाई गई। गहराई से पड़ताल करने पर मामले की परतें खुलती चली गाईं और पता चला कि यह षड्यंत्र अंजलि द्वारा कुछ वकीलों के साथ मिलकर राहुल को फँसाने और उससे 5 लाख रुपए ऐंठने के लिए रचा गया था।
पुलिस द्वारा पूछताछ में पता चला है कि राहुल सिकरवार का वकील अवनीश वैश्य भी इस षड्यंत्र में संलिप्त था और वसूली के रुपए का लेनदेन उसके माध्यम से ही हुआ था। अंजलि ने बताया कि राहुल से वसूले जाने वाले 5 लाख रुपए में से दो लाख उसको मिलने थे, जबकि 2 लाख चारों वकीलों को मिलने थे, और 1 लाख रुपए वकीलों की फ़ीस थी।
थाना प्रभारी अरविन्द कुमार के नेतृत्व में इस मामले को सुलझाने वाली टीम में उपनिरीक्षक नीलम राणा, उपनिरीक्षक सोनू कुमार एवं अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
सामाजिक कार्यकर्ता समीर ने इस केस को सफलतापूर्वक सुलझाने वाली पुलिस टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के झूठे मुक़दमे में फँसने से किसी भी नागरिक का जीवन बर्बाद हो सकता है और असली दोषियों को सलाख़ों के पीछे पहुँचाकर (lawyers arrested) थाना हरीपर्वत पुलिस ने अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया है।

