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ताजमहल के पास सांसों पर संकट, सरकारी आंकड़ों में ‘साफ’ हुई शहर की हवा!

आगरा में वायु प्रदूषण के सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी विरोधाभास सामने आया है, जिसने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर में एक तरफ कागजों और ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा को नियंत्रण में दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऐतिहासिक स्मारकों और…

आगरा में वायु प्रदूषण के सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी विरोधाभास सामने आया है, जिसने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर में एक तरफ कागजों और ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा को नियंत्रण में दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऐतिहासिक स्मारकों और संवेदनशील इलाकों के आंकड़े कुछ और ही दास्तान बयां कर रहे हैं। शहर के सबसे व्यस्त और व्यावसायिक केंद्रों में शुमार संजय प्लेस में धूल के गुबार, सड़कों की खुदायी और भारी ट्रैफिक के बावजूद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के ऑटोमैटिक स्टेशन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मात्र 96 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। इसके विपरीत, चारों तरफ हरियाली से घिरे और वाहनों के पूर्ण प्रतिबंध वाले ताजमहल क्षेत्र यानी दशहरा घाट स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की लैब में AQI 349 दर्ज किया गया है। ताजमहल के मेहमानखाने में लगे डिस्प्ले बोर्ड पर पार्टिकुलेट मैटर (PM-10) की मात्रा 349 और PM-2.5 की मात्रा 249 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड की गई, जो एक ही शहर में लगभग पांच गुना का हैरान करने वाला अंतर दिखाता है।
इस विरोधाभास पर पर्यावरणविदों और कानूनी जानकारों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पर्यावरणविद एवं याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदूषण मापक यंत्रों के पास पानी का छिड़काव करके जानबूझकर AQI कम दिखाया जा रहा है, जो जनता के साथ सीधी धोखाधड़ी है। उन्होंने UPPCB, ASI और अन्य संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं पर्यावरणविद् डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब तक प्रदूषण के असली और पारदर्शी आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक इसका निवारण असंभव है और यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। हालांकि, UPPCB के पर्यावरण अधिकारी रामगोपाल का कहना है कि वे डेटा में अंतर की जांच कराएंगे और पारंपरिक फिल्टर पेपर तकनीक में कोई दिक्कत हो सकती है, जबकि ASI साइंस ब्रांच के निदेशक डॉ. एमके भटनागर का दावा है कि उनकी लैब फिल्टर पेपर तकनीक से 24 घंटे का सटीक डेटा तैयार करती है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है।
ताजमहल की जिस लैब में AQI 349 दर्ज किया गया, उसके आसपास की जमीनी हकीकत भी बदहाल नजर आती है। यमुना नदी के पास स्थित इस क्षेत्र में सड़क पर चारों तरफ पानी, कीचड़ और रेत फैली हुई है, जबकि पुरानी मंडी चौराहे के पास से निकलने वाले भारी वाहनों और सड़कों पर उड़ती धूल के कारण पास के शाहजहां गार्डन में भी प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा पाया गया है। इन विरोधाभासी आंकड़ों के बीच आम जनता भ्रम की स्थिति में है। हवा में बढ़ते इस जहर और धूल-धुएं के कारण ताजनगरी के लोगों का जीना मुहाल हो गया है और उन्हें आंखों में जलन, नाक की एलर्जी, गले में खराश और सीने में जकड़न जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज के श्वास एवं क्षय रोग विभाग के डॉक्टर गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि दूषित हवा और धूल-धुएं के कारण पिछले एक हफ्ते में अस्थमा और सांस के मरीजों की संख्या में 15 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर श्वास नली को संक्रमित कर रही है।
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