आगरा एयरफोर्स बेस के बाहर सिविल एयरक्राफ्ट के परिचालन के लिए प्रस्तावित लगभग रु. 400 करोड़ की लागत से बनने वाली आगरा सिविल एयर टर्मिनल (Civil Air Terminal) परियोजना पर्यावरणीय मंजूरी न मिलने के कारण 5 वर्षों से अधिक समय तक अधर में रहने के बाद आश्चर्यजनक रूप से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
आगरा स्थित वरिष्ठ अधिवक्ता किशन चंद जैन ने बताया है कि उन्होंने 22 अप्रैल 2022 को आरटीआई अधिनियम के तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से यह जानने की मांग की थी कि सिविल एयर टर्मिनल (Civil Air Terminal) परियोजना में क्या प्रगति हुई है, और एएआई ने उन्हें सूचित किया है कि परियोजना को स्थगित कर दिया गया है। मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण उसे पर्यावरण मंजूरी नहीं मिली है।
जैन ने दावा किया कि यह जानकारी एएआई ने पिछले 18 मई को जारी अपने पत्र में आरटीआई कानून के तहत दी थी। जैन ने आगरा के नए सिविल टर्मिनल (Civil Air Terminal) की निर्माण परियोजना की वर्तमान स्थिति, योजना के लिए कुल बजट राशि, परियोजना के पूरा होने की समय सीमा और परियोजना के शुरू होने में देरी के कारण की जानकारी मांगी थी।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अपने जवाब में सूचित किया है कि 398 करोड़ रुपये की निर्माण लागत से व्यस्त समय के दौरान 700 यात्रियों के लिए 30,000 वर्गमीटर क्षेत्र के टर्मिनल भवन की योजना बनाई गई थी। अदालती मामले के कारण योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। पर्यावरण मंजूरी प्राप्त नहीं हुई है।
जवाब में यह भी उल्लेख है कि सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका दायर की गई है। जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है और चारदीवारी का निर्माण कर दिया गया है। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद दोबारा कार्य योजना बनाई जाएगी।
श्री जैन ने इस सूचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 11.12.2019 के द्वारा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को आगरा हवाई अड्डे पर एक अतिरिक्त टर्मिनल (Civil Air Terminal) बनाने की अनुमति दी थी। ऐसे में आश्चर्य की बात है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी को सिविल टर्मिनल बनाने के लिए पर्यावरण मंजूरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां जल्द से जल्द नया सिविल टर्मिनल बनाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर सूचना के अधिकार में इस बात का खुलासा किया गया है कि योजना फिलहाल टाल दी गई है, जो पर्यटन व अन्य उद्योगों के लिए बेहद निराशाजनक है।

