आगरा में सेंट्रल जीएसटी (GST) (वस्तु एवं सेवा कर) की करोड़ों की चोरी का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है। कुल 32.56 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के लिए 100 से अधिक फर्जी कंपनियां बनाकर 184.56 करोड़ रुपये की फर्जी इनवॉइस जारी करने के आरोप में सेंट्रल जीएसटी (GST) की टीम ने इस गिरोह के मास्टरमाइन्ड समेत चार आरोपियों को गुरुवार को गिरफ़्तार कर लिया।
यह सारी फर्जी कंपनियां गरीब दिहाड़ी मजदूरों आदि के पैन कार्ड व पहचानपत्रों पर रजिस्टर्ड थीं। एक कंसल्टेंसी फर्म चलाने वाले वरुण गुप्ता व उसके साथियों ऋषभ मित्तल, विकास अग्रवाल और सुनील राठौर ने 100 से अधिक फर्जी फर्म बनाकर यह घोटाला किया जिसमें किसी माल का लेन-देन नहीं हुआ, सिर्फ़ फर्जी इनवॉइस के जरिए लगातार तीन साल तक यह खेल चलता रहा। फिलहाल इन्होंने 95 फ़र्मों में यह फर्जीवाड़ा फैला रखा था।
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📲 WhatsApp पर विज्ञापन बुक करेंसेंट्रल जीएसटी (GST) के सूत्रों के अनुसार आरोपियों के घरों और अन्य ठिकानों से फर्जी आईटीसी वसूलने से जुड़े पर्याप्त सबूत इकट्ठे हो चुके हैं और चारों लोगों ने अपना जुर्म भी कबूल किया है जिसके बाद अब टीम इनसे जुड़े अन्य लोगों को भी तलाश कर रही है। सूत्रों ने बताया है कि सीजीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 132 (1) (बी) और (सी) के तहत यह संज्ञेय गैर जमानती अपराध है, जिसमें पांच साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
पिछले वर्ष भी सेंट्रल जीएसटी (GST) ने आगरा में फर्जी इनवॉइस पर 100 करोड़ की आईटीसी वसूली घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसमें चंद्र प्रकाश कृपलानी 120 फर्जी फ़र्मों में 691 करोड़ रुपये की फर्जी बिक्री दिखाकर 100 करोड़ रुपये का आईटीसी वसूला था।
