आगरा में पांच वर्ष तक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रवर्तन के पद पर तैनात रहे सेवानिवृत्त अधिकारी ललित कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उत्तर प्रदेश विजिलेंस की टीम ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में लखनऊ स्थित उनके आवास पर 7 और 8 जुलाई को करीब 26 घंटे तक चली छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी, हीरे के आभूषण और करोड़ों रुपये की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। (The Times of India)
जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखे गए 1.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 13 किलोग्राम सोना, 9 किलोग्राम चांदी, हीरे के आभूषण और कई लॉकर मिले। सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूअर द्वारा सोने-चांदी और आभूषणों का मूल्यांकन 20 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। (TV9 Bharatvarsh)
ललित कुमार अक्तूबर 2020 में कानपुर से स्थानांतरित होकर आगरा आए थे। उन्होंने अक्तूबर 2025 में सेवानिवृत्त होने तक एआरटीओ (प्रवर्तन) के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान वाहन चेकिंग अभियानों में चालकों से विवाद, कथित अवैध वसूली, टोल प्लाजा पर झड़प और परिवहन विभाग को मिली कई शिकायतों के कारण उनका नाम लगातार चर्चा में रहा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन किसी भी मामले में निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई। लंबी छुट्टियों को लेकर तत्कालीन आरटीओ के साथ मतभेद भी चर्चा का विषय रहे।
विजिलेंस जांच में नकदी और जेवरात के अलावा 13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। प्रारंभिक जांच में नोएडा, लखनऊ सहित कई स्थानों पर प्लॉट और फ्लैट होने के दस्तावेज सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार नोएडा में लगभग 20 करोड़ रुपये के भूखंड और फ्लैटों का भी पता चला है, जिसकी जांच जारी है। (Navbharat Times)
इसके अलावा टीम को टोयोटा इनोवा और हुंडई आई-20 कार, लाइसेंसी रिवॉल्वर, विभिन्न बैंकों, डाकघर, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश, महंगे घरेलू उपकरण और आलीशान इंटीरियर से जुड़े साक्ष्य भी मिले हैं। (The Times of India)
ललित कुमार वर्ष 2016 से 2019 तक कानपुर आरटीओ कार्यालय में संभागीय परिवहन निरीक्षक (आरआई) रहे। वर्ष 2019 में पदोन्नति के बाद उन्हें एआरटीओ बनाया गया। कानपुर में उनके कार्यकाल के दौरान वाहन फिटनेस और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई थीं।
सूत्रों के अनुसार, कई आरटीआई कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर जांच भी बैठाई गई थी, हालांकि अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।
विजिलेंस जांच के अनुसार, कानपुर कार्यकाल के दौरान ही ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि संबंधित अवधि में उन्होंने 93.26 लाख रुपये की वैध आय अर्जित की, जबकि चल-अचल संपत्तियों के अर्जन, पारिवारिक खर्च और अन्य मदों पर 1.61 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। इस प्रकार लगभग 68.66 लाख रुपये का खर्च वैध आय से अधिक पाया गया। इसी आधार पर आगे की जांच शुरू की गई थी। (The Times of India)
ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली के नूर मार्केट क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने वहीं के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) से शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 2010-11 में वह करीब डेढ़ वर्ष तक रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में आरआई के पद पर भी कार्यरत रहे। आरआई बनने से पहले वह उत्तर प्रदेश रोडवेज में फोरमैन थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले वह रायबरेली आए थे, जहां किरायेदार से दुकान खाली कराने को लेकर विवाद भी हुआ था। यह मामला न्यायालय तक पहुंचा था और अदालत के आदेश के बाद उन्होंने दुकान का कब्जा लिया था।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों का विस्तृत सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दायरे में विभिन्न शहरों में स्थित अचल संपत्तियां, वित्तीय लेन-देन और संभावित बेनामी निवेश भी शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। (The Times of India)
(नोट: मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों और बरामद संपत्तियों का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।)

