
ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में निलंबित कण पदार्थ (एसपीएम) का सबसे गंभीर असर फतेहपुर सीकरी नगर पालिका परिषद क्षेत्र में देखा जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए घातक बनता जा रहा है। यह जानकारी सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने दी।
अनिल शर्मा ने बताया कि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष शबनम मा. इस्लाम के अनुसार, यद्यपि पूरे ताज ट्रिपेजियम जोन में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, लेकिन फतेहपुर सीकरी और उससे सटे ग्रामीण इलाकों पर राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाओं का सीधा और अधिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र स्वयं प्रदूषणकारी नहीं है, इसके बावजूद यहां के नागरिक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायु प्रदूषण में 2.5 माइक्रोन या उससे छोटे सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) की भूमिका सबसे अधिक है। ये कण सांस के साथ मानव शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न करते हैं।
अनिल शर्मा ने बताया कि नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने ताज ट्रिपेजियम जोन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं आगरा मंडलायुक्त को पत्र लिखकर फतेहपुर सीकरी के भूजल स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि हरित क्षेत्र का विस्तार वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक हो सकता है, लेकिन इसके लिए भूजल की स्थिति में सुधार अनिवार्य है। इसके लिए भूजल विभाग से समन्वय कर ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की गई है।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव ने बताया कि तेरहमोरी बांध क्षेत्र में भूजल स्तर को बनाए रखने में पहले अहम भूमिका निभाता था, लेकिन बांध के गेट क्षतिग्रस्त और असंचालित होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते चले गए हैं। स्थिति यह है कि अब पूरा इलाका लगभग हैंडपंप-विहीन हो चुका है।
तेरहमोरी बांध उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के तृतीय मंडल, सिंचाई कार्य, आगरा के लोअर खंड के अंतर्गत आता है। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने संबंधित अधिशासी अभियंता से क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मत के लिए एस्टीमेट तैयार कराने की अपेक्षा जताई है, ताकि शासन से धन उपलब्धता के लिए प्रयास किए जा सकें।

अनिल शर्मा ने बताया कि स्थानीय अनुभव बताते हैं कि गर्म हवाएं पहले भी चलती रही हैं, लेकिन जब से मानसून के दौरान तेरहमोरी बांध में जलभराव और उसका ठहराव बंद हुआ है, तब से हालात अत्यंत गंभीर हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में अब जमीनी अनुभवों के आधार पर ही समस्याओं का आकलन और समाधान की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब तक बांध में पानी रहता था, तब तक भूजल स्तर बेहतर था, अधिकांश नगरीय क्षेत्रों में हैंडपंप चलते थे और लगाए गए पेड़ पनपते थे।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के हवाले से अनिल शर्मा ने बताया कि तेरहमोरी बांध में मानसून के दौरान जलभराव सुनिश्चित किया जाए और रबी की बुवाई तक पानी का ठहराव बनाए रखा जाए। इससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन से पत्राचार किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि तेरहमोरी बांध विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी स्मारक समूह का हिस्सा है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (आगरा सर्किल) की सूची में “भरतपुर मार्ग पर स्थित वायडक्ट” के रूप में दर्ज है।
अनिल शर्मा ने कहा कि सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा नगर पालिका परिषद अध्यक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों से पूरी तरह सहमत है और इसे समय की आवश्यकता मानती है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर क्षेत्र के कई प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद किया गया, जिनमें अमरनाथ पाराशर, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष इस्लाम, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शुक्ला, डाबर गांव के पूर्व प्रधान धर्म सिंह महोरा और असलम सलीमी शामिल हैं।
संवाद के दौरान सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि तेरहमोरी बांध में राजस्थान के भरतपुर स्थित अजान बांध के डाउनस्ट्रीम कैचमेंट एरिया का पर्याप्त पानी आता है, साथ ही फतेहपुर सीकरी के रिज क्षेत्र से भी अच्छी जलराशि यहां पहुंचती है। लेकिन बांध के गेट और संरचना की मरम्मत न होने के कारण यह पानी बहकर निकल जाता है। परिणामस्वरूप मानसून समाप्त होते ही पूरा क्षेत्र सूखाग्रस्त जैसी स्थिति में पहुंच जाता है।


