By signature : Whymper and P. SmitLydekker, Richard - Lydekker, 1894 Royal Natural History. Vol 3. (www.archive.org), Public Domain, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=1909182चंबल नदी का पानी फतेहपुर सीकरी तक ले जाने की योजना से बाह तहसील में भयंकर जल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। इस परियोजना से न केवल किसानों की सिंचाई व्यवस्था बाधित होगी, बल्कि स्थानीय जलस्रोतों पर भी गहरा असर पड़ेगा। जल संकट के गंभीर परिणामों को देखते हुए सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा और क्षेत्रीय नेताओं ने इस योजना का विरोध किया है।

जल दोहन से प्रभावित होगी बाह की अर्थव्यवस्था

पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चंबल नदी का जल पहले से ही सीमित मात्रा में उपलब्ध है। कोटा बैराज से आगरा जिले तक पहुंचने वाली जलराशि का पहले से ही अत्यधिक दोहन हो रहा है। ऐसे में यदि कोई नई परियोजना शुरू की जाती है, तो राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह चंबल लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम की नहरों का संचालन ठप हो सकता है, जिससे बाह तहसील की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “बाह मेरी कर्मभूमि है, और मैं यहां के किसानों और आम जनता के हितों की अनदेखी नहीं कर सकता। यदि इस योजना पर अमल किया गया, तो मैं इसका कड़ा विरोध करूंगा।उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी रानी पक्षालिका सिंह वर्तमान में बाह की विधायक हैं और वह भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगेंगी।

चंबल नदी में पहले से ही पानी की कमी

बाह तहसील के जल संकट पर सिविल सोसाइटी आगरा के सचिव अनिल शर्मा, सदस्य राजीव सक्सेना और असलम सलीमी के साथ चर्चा करते हुए राजा अरिदमन सिंह ने बताया कि चंबल नदी के पानी का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही आगरा क्षेत्र को मिलता है। इस सीमित जलराशि में से 450 क्यूसेक पानी बाह के लिए निर्धारित है, और यही जल नेशनल चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट के 635 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए भी आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि जलस्तर 111 मीटर से नीचे जाते ही नदी में रहने वाले घड़ियाल और डॉल्फिन जैसे जलचरों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यदि जल की निकासी इसी प्रकार होती रही, तो यह संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।

रुड़की विश्वविद्यालय की योजना से बढ़ेगा जल संकट

रुड़की विश्वविद्यालय (IIT रुड़की) की एक योजना के तहत चंबल नदी से जल संग्रह कर उटंगन नदी पर एक डैम बनाया जाएगा और इस पानी को फतेहपुर सीकरी विकास खंड में पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना की जानकारी सामने आते ही बाह तहसील के किसानों और पर्यावरणविदों में चिंता बढ़ गई है।

राजा अरिदमन सिंह ने कहा, “रुड़की विश्वविद्यालय की इस योजना को स्थानीय हितों को नजरअंदाज कर बनाया गया है, और इसके गंभीर नकारात्मक परिणाम होंगे। हमें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन यदि इस योजना पर काम शुरू हुआ, तो हम इसका हर संभव विरोध करेंगे।

सिंचाई परियोजना पर संकट के बादल

चंबल डाल लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट बाह के किसानों के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है। यह नहर बाह तहसील के पिनहाट विकास खंड से शुरू होकर कई गांवों तक जल आपूर्ति करती है। यदि इस जलराशि को अन्यत्र भेजा गया, तो किसानों को भयंकर जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

राजा अरिदमन सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज महाराज महेंद्र रिपुदमन सिंह ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर इस परियोजना को स्वीकृत कराया था, ताकि बाह तहसील के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। सरकार ने इस परियोजना का नाम भीराजा महेंद्र रिपुदमन सिंह चंबल डाल परियोजनारख दिया, जिससे इसकी महत्ता साफ झलकती है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 69.6 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर, 67.1 किलोमीटर लंबी रजवाहा और 20.1 किलोमीटर लंबी अन्य जल धाराओं के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। इस प्रणाली से भूजल स्तर भी संतुलित रहता है और पेयजल संकट की स्थिति नहीं बनती।

नेशनल चंबल सेंचुरी पर भी असर

यदि चंबल नदी से अधिक मात्रा में जल निकासी की गई, तो इसका सबसे बड़ा असर नेशनल चंबल सेंचुरी पर पड़ेगा। डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे जलचर जल स्तर कम होने के कारण संकट में आ जाएंगे। जलस्तर घटने पर सेंचुरी प्रशासन की मोटर नौकाओं का संचालन भी मुश्किल हो जाता है, जिससे अवैध शिकार और रेत खनन जैसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

राजा अरिदमन सिंह ने बताया कि पहले मार्चअप्रैल तक चंबल में जलस्तर 111 मीटर तक बना रहता था, लेकिन अब फरवरी के दूसरे सप्ताह में ही जल की भारी कमी देखी जा रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग पैदल ही नदी पार करने लगे हैं।

कोटा बैराज से उत्तर प्रदेश को मिलने वाले जल पर संकट

कोटा बैराज से उत्तर प्रदेश को मिलने वाले जल का दस प्रतिशत ही आगरा के लिए आवंटित होता है। इस जलराशि में भी राजस्थान और मध्य प्रदेश अपने हिस्से का पानी रोक लेते हैं, जिससे आगरा क्षेत्र में जल की उपलब्धता और भी कम हो जाती है।

कोटा बैराज का कुल जलग्रहण क्षेत्र 27,332 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसमें से केवल 137 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ही जल मुक्त रहता है। कोटा बैराज से निकलने वाले पानी का 50 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं में चला जाता है। ऐसे में आगरा और बाह क्षेत्र के किसानों को पहले ही जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। यदि इस जलराशि को और कम किया गया, तो हालात विकट हो जाएंगे।

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा ने किया विरोध

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने इस परियोजना का पुरजोर विरोध किया है और सरकार से अपील की है कि बाह क्षेत्र के किसानों और स्थानीय जल आपूर्ति को बचाने के लिए इस योजना को रद्द किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस परियोजना को लागू किया गया, तो क्षेत्र में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

Vishal Sharma
Vishal Sharma

Vishal Sharma is an experienced Indian journalist, cyber security consultant, social activist, and poet writing under the pen name Surur Akbarabadi. With over two decades in journalism, he has worked across print, digital, and TV media, including notable roles at The Indian Express, The Pioneer, Indo-American Times, and Business Standard. He is currently the editor of Agra24.in, a bilingual news portal focused on Agra, which he co-founded to provide in-depth analysis and balanced reporting. Based in Agra and Lucknow, Vishal balances his professional commitments with family life. Academically, he has studied Life Sciences, Law, and Business Management. His journalism covers current affairs, business, and social issues, with a focus on factual reporting and avoiding controversial topics that could harm social harmony. He actively promotes communal harmony through his role as Vice-Chairman of Hindustani Biradari, an organization founded to emphasize unity beyond religion and caste. He is also Secretary of the Agra Tourist Welfare Chamber and was also a member of Agra’s Heritage and History Conservation Committee, working to preserve the city’s cultural heritage. Professionally, Vishal brings his cyber security expertise to his media work, enhancing the technical and editorial quality of his news platforms. His interests include photography and travel, particularly exploring India’s diverse landscapes and cultural heritage sites. His contributions reflect a steady commitment to journalism, cultural preservation, and social cohesion without excessive embellishment.

By Vishal Sharma

Vishal Sharma is an experienced Indian journalist, cyber security consultant, social activist, and poet writing under the pen name Surur Akbarabadi. With over two decades in journalism, he has worked across print, digital, and TV media, including notable roles at The Indian Express, The Pioneer, Indo-American Times, and Business Standard. He is currently the editor of Agra24.in, a bilingual news portal focused on Agra, which he co-founded to provide in-depth analysis and balanced reporting. Based in Agra and Lucknow, Vishal balances his professional commitments with family life. Academically, he has studied Life Sciences, Law, and Business Management. His journalism covers current affairs, business, and social issues, with a focus on factual reporting and avoiding controversial topics that could harm social harmony. He actively promotes communal harmony through his role as Vice-Chairman of Hindustani Biradari, an organization founded to emphasize unity beyond religion and caste. He is also Secretary of the Agra Tourist Welfare Chamber and was also a member of Agra’s Heritage and History Conservation Committee, working to preserve the city’s cultural heritage. Professionally, Vishal brings his cyber security expertise to his media work, enhancing the technical and editorial quality of his news platforms. His interests include photography and travel, particularly exploring India’s diverse landscapes and cultural heritage sites. His contributions reflect a steady commitment to journalism, cultural preservation, and social cohesion without excessive embellishment.