
ऑल इंडिया हिंदुस्तानी बिरादरी द्वारा गुरुवार को फतेहपुर सीकरी दरगाह हज़रत शेख सलीम चिश्ती के सज्जादानशीन एवं सूफी परंपरा के प्रतिष्ठित संत पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती के निधन पर एक शोकसभा आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की मग़फ़िरत और शांति के लिए दुआ की।
बिरादरी के चेयरमैन एवं भारत सरकार के कबीर सम्मान से सम्मानित हाजी डॉ. सिराज कुरैशी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि इंसानियत, सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब के सच्चे प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि जब उन्हें फतेहपुर सीकरी वक्फ कमेटी का अध्यक्ष बनने का अवसर मिला, तब अपने दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान रईस मियां कमेटी के सदस्य रहे। उस अवधि में उन्होंने हर आवश्यक अवसर पर पूरा सहयोग दिया और वक्फ की व्यवस्थाओं तथा दरगाह की गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. कुरैशी ने कहा कि उनका सरल स्वभाव, दूरदर्शिता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की सोच सदैव स्मरणीय रहेगी। उनके निधन से एक ऐसा रिक्त स्थान उत्पन्न हुआ है जिसकी भरपाई कठिन है।
ऑल इंडिया हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष एवं आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के सचिव विशाल शर्मा ने कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती ने फतेहपुर सीकरी की सूफी विरासत को देश और दुनिया तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके व्यक्तित्व में आध्यात्मिकता, विनम्रता और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम था। उन्होंने कहा कि रईस मियां का जीवन सभी धर्मों और समुदायों के बीच प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश देता रहा। उनका निधन आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।
शोकसभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि पीरज़ादा रईस मियां चिश्ती ने जीवनभर सूफी परंपरा, मानव सेवा और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने का कार्य किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इस अवसर पर बिरादरी के महासचिव विजय उपाध्याय, ज़ियाउद्दीन, समी आगाई, इरफान सलीम, दीप शर्मा, राजकुमार नागरथ, समीर कुरैशी, मुकेश कर्दम, ग्यास कुरैशी और समीउद्दीन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की मग़फ़िरत के लिए दुआ करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।


