T20 विश्वकप के दौरान भारत – पाक क्रिकेट मैच में जब पाकिस्तानी टीम की भारत की टीम के ऊपर विजय हुई तो उस समय आगरा के राजा बलवंत सिंह कॉलेज में पढ़ने वाले तीन कश्मीरी छात्रों को पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह की धाराएं लगाकर जेल भेजा गया था।
जब उन तीनों छात्रों को पुलिस हिरासत में कोर्ट लाया गया तो उस समय हिंदूवादी संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनपर हमला किया। उसी समय आगरा के वकीलों (Agra Lawyers) के एक संगठन ने यह निर्णय लिया कि इन तीनों छात्रों की पैरवी हम नहीं करेंगे। उन वकीलों के इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और इमरान अली धर ने ट्वीट किये थे। इन ट्वीट्स में इन कश्मीरी नेताओं ने गिरफ्तार छात्रों को कानूनी मदद न देने के आगरा के वकीलों के निर्णय को गलत बताया था और कहा था कि कॉलेज प्रशासन द्वारा कश्मीरी छात्रों को क्लीन चिट दी जा चुकी है और ऐसे में इनके खिलाफ पुलिस की कार्यवाही सही नहीं है।
इन ट्वीट्स पर आक्रोशित होकर आगरा के वकीलों (Agra lawyers) ने शनिवार को आगरा दीवानी न्यायालय परिसर के बाहर, जिले में लागू धारा 144 का उल्लंघन करते हुए उन नेताओं के कथन के विरोध में उमर अब्दुल्ला और इमरान अली धर के पुतले फूंक कर इनके खिलाफ नारे भी लगाए। स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के नुमाइंदों की मौजूदगी में यह सब हुआ, लेकिन सभी खामोशी से यह नजारा देखते रहे।
The college authorities have given these students a clean chit & confirmed they didn’t shout any slogans. Rather than take the college assurance at face value the UP police is victimising these poor kids. https://t.co/R1GSTumV6d
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) October 29, 2021
एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि यह सब युवा अधिवक्ता संघ के संयुक्त तत्वावधान में आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन, जनपद बार एसोसिएशन सहयोग समिति, एवं भाजपा कानून एवं विधि विषयक विभाग के अधिवक्ता दीवानी में एकत्र हुए थे। इसके बाद आरोपी छात्रों का समर्थन करने वाले कश्मीरी नेताओं के पुतले फूंके गए हैं।
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि RBS कॉलेज में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने देश विरोधी गतिविधि की थी। इस पर उनके खिलाफ मुकदमा कर उन्हें जेल भेजा गया था। संघ ने यह निर्णय लिया है कि इस केस में संघ से सम्बंधित वकील इन कश्मीरी छात्रों को कोई कानूनी मदद नहीं करेगा।
इसी सन्दर्भ में आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील शर्मा का कहना है कि इन छात्रों से अधिवक्ता समाज (Agra Lawyers) खिन्न है। इस दौरान जनपद बार एसोसिएशन के महासचिव कृष्ण मुरारी माहेश्वरी, भाजपा कानून एवं विधि विषयक विभाग के महानगर संयोजक उमेश वर्मा आदि ने कहा कि जो अधिवक्ता इन तीनों छात्रों की पैरवी करेगा हम उस अधिवक्ता का भी विरोध करेंगे।
वकीलों के संघ के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष 2010 में माननीय उच्चतम न्यायलय में न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने एक आदेश में देश भर के बार संघों में किसी न किसी कारण से कुछ आरोपी व्यक्तियों के लिए पेश होने के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की बढ़ती प्रवृत्ति की निंदा की थी। माननीय न्यायालय ने कहा था कि वकील या उनके संघ अभियुक्तों के लिए पेश होने से इनकार नहीं कर सकते हैं, चाहे वे आतंकवादी, बलात्कारी, हत्यारे या कोई अन्य हों क्योंकि इस तरह से इनकार करना संविधान, बार काउंसिल के मानदंडों और भगवद गीता के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।
उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता प्राप्त करना भारत में रह रहे हर नागरिक और गैर – नागरिक का अधिकार है, और इस अधिकार से उनको वंचित नहीं किया जा सकता। अधिवक्ता जब अपने मुवक्किल के केस को हाथ में लेता है तो उसका धर्म केवल अपने मुवक्किल को न्याय दिलाना होता है। यह तय करना अधिवक्ता का काम नहीं है कि उसका मुवक्किल दोषी है, अथवा निर्दोष है। अगर कोई अधिवक्ता यह केस लेने में असमर्थ है तो वह खुद मना कर सकता है, लेकिन अन्य अधिवक्ताओं को भी केस न लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

