जैसे-जैसे वर्ष 2021 बीत रहा है, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट तेज़ होने लगी है और प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेजी पकड़ रही हैं। आज प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में अलीगढ़ के लोधा में किया गया राजा महेन्द्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय व डिफेंस कॉरिडोर का शिलान्यास भी इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस अवसर पर किये गए प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन में यह साफ़ है कि जहाँ भाजपा राजा महेंद्र प्रताप सिंह के रूप में राष्ट्रवाद का एक नया प्रतीक खड़ा करने की कोशिश कर रही है, वहीं अलीगढ़ से जुड़ी दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की विरासत को भी वह पूरी तरह भुनाना चाहती है।
शिलान्यास के अवसर पर उपस्थित भाजपा समर्थकों एवं स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमन्त्री मोदी ने कल्याण सिंह को नमन करते हुए ही अपना भाषण शुरू किया और कहा कि उन्हें आज इस धरती के महान सपूत स्वर्गीय कल्याण सिंह की अनुपस्थिति बहुत ज्यादा महसूस हो रही है। मोदी ने कहा कि आज कल्याण सिंह हमारे साथ होते तो राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय और डिफेंस सेक्टर में बन रही अलीगढ़ की नई पहचान को देखकर बहुत खुश हुये होते। उनकी आत्मा जहां भी होगी हमें आशीर्वाद देती होगी।
ताला नगरी के रूप में विख्यात अलीगढ़ को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है लेकिन इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन दान करने वाले स्थानीय जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर अलीगढ़ में बन रहे विश्वविद्यालय का शिलान्यास करते हुए प्रधानमन्त्री ने कहा कि भारत का हजारों वर्ष का इतिहास राजा महेंद्र प्रताप सिंह जैसे राष्ट्र भक्तों से भरा है, जिन्होंने समय-समय पर भारत को अपने तप और त्याग से दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद ऐसे राष्ट्र नायक और राष्ट्र नायिकाओं की तपस्या से अगली पीढ़ी को परिचित ही नहीं कराया गया और उनकी गाथाओं को जानने से देश की कई पीढ़ियां वंचित रह गई। बीसवीं सदी की उन गलतियों को 21वीं सदी का भारत सुधार रहा है। महाराजा सुहेलदेव हो चौधरी छोटूराम हो या फिर राजा महेंद्र प्रताप सिंह हो। राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराने का ईमानदारी से प्रयास आज देश में हो रहा है।

प्रधानमन्त्री ने कहा कि आज जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है, तो भारत की आजादी में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को नमन करने का यह एक पावन अवसर है। आज देश के युवा जो बड़े सपने देखने के साथ बड़े लक्ष्य पाना चाहते हैं। उन्हें राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में अवश्य जानना और पढ़ना चाहिए। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन से हमें अदम्य इच्छाशक्ति अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरने की जीवटता की प्रेरणा मिलती है।
प्रधानमन्त्री ने बताया कि राजा महेन्द्र प्रताप ने सिर्फ भारत में ही रह कर भारत के लोगों को आजादी के लिए प्रेरित नहीं किया बल्कि वह भारत की आजादी के लिए दुनिया के कोने – कोने में गए।  अफगानिस्तान हो, पोलैंड हो, जापान हो, दक्षिण अफ्रीका हो, वे अपने जीवन पर हर खतरा उठाते हुए भारत माता को गुलामी की जंजीर से आजाद कराने के लिये जी जान से जुटे रहे।
राजा महेंद्र प्रताप द्वारा लड़ी गई आजादी की लड़ाई में गुजरात के योगदान का उल्लेख करते हुए प्रधानमन्त्री मोदी ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के समय राजा महेंद्र प्रताप विशेष तौर पर गुजरात के महान सपूत श्याम जी कृष्णा वर्मा और लाला हरदयाल से मिलने के लिए यूरोप गए थे। उसी बैठक में जो दिशा तय हुई उसका परिणाम हमें अफगानिस्तान में भारत की पहली निर्वासित सरकार के तौर पर देखने को मिला। इस सरकार का नेतृत्व राजा महेंद्र प्रताप ने किया था।
प्रधानमन्त्री ने कहा कि मैं जब गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब 73 सालों बाद मुझे श्यामजी कृष्णा वर्मा की अस्थियां लाने का सौभाग्य मिला था। आज देश के प्रधानमंत्री के रूप में मुझे एक बार पुनः सौभाग्य मिला है कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह जैसे विजनरी के नाम पर बन रही यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करूँ। राजा महेंद्र प्रताप सिंह भारत की आजादी के लिए ही नहीं लड़े, उन्होंने भारत के भविष्य के निर्माण की नींव में भी सक्रिय योगदान दिया था। उन्होंने अपने देश विदेश की यात्राओं से मिले अनुभवों का उपयोग भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए किया। उन्होंने वृंदावन में आधुनिक टेक्निकल कॉलेज अपने संसाधनों से अपनी पैतृक संपत्ति को दान करके बनवाया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए भी बड़ी जमीन राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने दान दी थी।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा का एक बड़ा केंद्र तो बनेगा ही, साथ ही देश में डिफेंस से जुड़ी पढ़ाई, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी टेक्नोलॉजी और नई मेन पावर बनाने वाला सेंटर भी बनेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जिस तरह शिक्षा, कौशल, स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया गया है, इससे इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को बहुत लाभ मिलेगा।
अलीगढ़ में बनने वाले डिफेन्स कॉरिडोर नोड पर बोलते हुए प्रधानमन्त्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश रक्षा उत्पाद निर्यातक के रूप में बन रही भारत की नई पहचान का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। अलीगढ़ में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी डेढ़ दर्जन से अधिक कंपनियां सैकड़ों करोड़ रुपए का निवेश कर यहाँ हजारों रोजगार के मौके उत्पन्न करने वाली हैं। अलीगढ़ नोड में छोटे हथियार, आयुध, ड्रोन, एयरोस्पेस मेटल कॉम्पोनेंट्स, डिफेंस पैकेजिंग जैसे उत्पाद बन सके, इसके लिए नए उद्योग लगाए जा रहे हैं। यह बदलाव अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्र को एक नई पहचान देगा। अभी तक लोग अपने घर और दुकानों की सुरक्षा के लिए अलीगढ़ के भरोसे रहते थे। अलीगढ़ का ताला दुकानों और घरों पर लगा होता था तो लोग निश्चिंत हो जाते थे। अब अलीगढ़ के रक्षा उपकरण भी 21वीं सदी में हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा करने का काम करेगें।

इसके बाद चुनावी मोड में आते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफों के पुल बाँध दिए। मोदी ने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट’ योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने अलीगढ़ के तालों और हार्डवेयर को एक नई पहचान दिलाने का काम किया है। इससे युवाओं के लिए, एमएसएमई के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। अब डिफेंस इंडस्ट्रीज के जरिए भी यहां के मौजूदा उद्यमियों को विशेष लाभ होगा और नए एमएसएमई के लिए प्रोत्साहन भी प्राप्त होगा। जो छोटे उद्यमी हैं, उनके लिए भी डिफेंस कॉरिडोर का अलीगढ़ नोड नए मौके बनाएगा। आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के हर छोटे बड़े निवेशक के लिए बहुत आकर्षक स्थान बनता जा रहा है। यह जब होता है, जब निवेश के लिए जरूरी माहौल बनने के साथ जरूरी सुविधाएं मिलती हैं।

उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश डबल इंजन सरकार के डबल लाभ का एक नया उदाहरण है। योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम ने सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास जीतकर उत्तर प्रदेश को नई भूमिका के लिए तैयार किया है। आज उत्तर प्रदेश की चर्चा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बड़े फैसला के लिए होती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो इसका एक बहुत बड़ा लाभार्थी है। ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप निर्माण, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मेट्रो कनेक्टिविटी, आधुनिक हाईवे जैसे अनेकों काम आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में चल रहे हजारों करोड रुपये के प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में भारत की प्रगति का बड़ा आधार बनेंगे। जिस उत्तर प्रदेश को देश के विकास में एक रुकावट के रूप में देखा जाता था, आज वही प्रदेश आज देश के बड़े अभियानों का नेतृत्व कर रहा है।

पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले गरीबों की हर योजना में रोड़े अटकाए जाते थे। एक-एक योजना लागू करने के लिए दर्जनों बार केंद्र की तरफ से चिट्ठी लिखी जाती थी, लेकिन यहां उस गति से काम नहीं होता था। उत्तर प्रदेश के लोग भूल नहीं सकते कि पहले यहां किस तरह के घोटाले होते थे, किस तरह राजकाज को भ्रष्टाचारियों के हवाले कर दिया गया था। आज योगी सरकार पूरी ईमानदारी से यूपी के विकास में जुटी हुई है।

उन्होंने कहा कि एक दौर था जब उत्तर प्रदेश में शासन प्रशासन गुंडों और माफियाओं की मनमानी से चलता था, लेकिन आज वसूली करने वाले, माफिया राज चलाने वाले सलाखों के पीछे हैं। आज यूपी में कोई अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचता है। योगी सरकार में गरीब की सुनवाई होने साथ गरीबों को सम्मान मिल रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का पारम्परिक झुकाव पूर्व प्रधानमन्त्री चौधरी चरण सिंह और राष्ट्रीय लोकदल की ओर रहा है। आजकल केंद्र सरकार से किसानों की नाराजगी भी जाहिर है। ऐसे में मोदी ने किसानों को साधने की कोशिश करते हुए कहा कि आजादी की इस अमृत काल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। बदलाव के साथ कैसे तालमेल बिठाना पड़ता है, इसका रास्ता स्वयं चौधरी चरण सिंह ने दशकों पहले देश को दिखाया है।

उन्होंने कहा कि जो रास्ता चौधरी साहब ने दिखाया उससे देश की खेती, मजदूरों, छोटे किसानों को कितना लाभ हुआ, यह हम सभी जानते हैं। जिन छोटे किसानों की चिंता चौधरी साहब को थी, उनके साथ सरकार खड़ी रहे यह बहुत जरूरी है। हमारे देश में छोटे किसानों की संख्या 80 प्रतिशत से ज्यादा है। इसलिए केंद्र सरकार का निरंतर प्रयास है कि छोटी जोत वाले किसानों को गति दी जाए। डेढ़ गुना एमएसपी हो, किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार हो, बीमा योजना में सुधार हो, 3000 की पेंशन की व्यवस्था हो, ऐसे अनेक फैसले छोटे-छोटे किसानों को सशक्त कर रहे हैं।

मोदी ने बताया कि कोरोना के समय में देश भर के छोटे किसानों के खाते में सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे ट्रांसफर किए हैं। इसमें 25000 करोड रुपए से ज्यादा उत्तर प्रदेश के किसानों को मिला है। उत्तर प्रदेश में पिछले 4 सालों में एमएसपी पर खरीद के नए रिकॉर्ड बने हैं। गन्ने के भुगतान को लेकर जो परेशानी आती थी, उन्हें लगातार कम किया जा रहा है। बीते 4 साल में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को 1 लाख 40000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया गया है। आने वाला साल में प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए नई संभावना का दरवाजा खुलने वाला है।

S Qureshi