girl riding scooter

girl riding scooterब्रज के आगरा और मथुरा जिलों की सड़कों पर वर्तमान में चार पहिया वाहन ब्रज के अन्य जिलों के मुकाबले अधिक दौड़ते दिखाई देते हैं। इन वाहनों की ड्राइविंग सीट पर अब नवयुवतियां और महिलाएं काफी संख्या में  दिखाई देने लगी हैं, लेकिन उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं, यह ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग वाले अधिक ध्यान देते नजर नहीं आते।

ताजनगरी आगरा, मथुरा और फ़िरोज़ाबाद में लगभग हर सड़क पर चार और दो पहिया वाहन चलती महिलाएं और नवयुवतियां दिखाई देती हैं, जबकि ब्रज क्षेत्र के अन्य जिलों – मैनपुरी, एटा, कासगंज और भरतपुर में दो पहिया वाहन चलती लड़कियां अधिक दिखती हैं।

लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस की अगर चेकिंग की जाए तो केवल 10 प्रतिशत लड़कियों के पास ही दिखाई देगा। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हर साल पंजीकृत होने वाली लगभग 25 प्रतिशत गाड़ियां महिलाओं के नाम दर्ज होती हैं लेकिन 6 महीने में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या केवल 10 प्रतिशत होती है। प्रतिवर्ष आगरा में ही लगभग 60 से 65 हजार ड्राइविंग लाइसेंस बनवाये जाते हैं। इनमें लाइसेंस बनवाने में पुरुषों से महिलाएं बहुत पीछे हैं।

कोरोना महामारी के समय आगरा के परिवहन विभाग ने प्रतिदिन लगभग 150 से 200 तक लाइसेंस बनाये, लेकिन महिलाओं ने केवल 18 बनवाये। परिवहन विभाग का रिकॉर्ड देखने पर मालूम हुआ कि आगरा में 25 प्रतिशत वाहन हर साल महिलाओं के नाम से पंजीकृत होते दिखाई दिए।

परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक देवदत्त शर्मा का कहना था कि गाड़ी भले ही महिलाओं के नाम पंजीकृत हों लेकिन उनके लाइसेंस की सांख्य बहुत काम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पर ध्यान देती हैं। इसके लिए अभिभावकों की सोच भी जिम्मेदार है और जागरूकता लाने की जरुरत है। शर्मा के अनुसार बिना लाइसेंस के वाहन चलने पर अधिकतम रु0 5000/- का जुर्माना होता है। यदि वाहन चालक के पास लाइसेंस नहीं है तो दुर्घटना होने पर बीमा क्लेम भी नहीं मिलता है।

वर्तमान में आगरा के परिवहन ऑफिस में 15 लाख से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस पंजीकृत हैं, जिनमें से महिलाओं के नाम केवल 3 लाख लाइसेंस हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1-4-2020 से 31-3-2021 तक पुरुषों के लगभग 44 हजार और महिलाओं के नाम 10 हजार वाहन पंजीकृत हुए, जबकि 1-4-2021 से 30-9-2021 तक पुरुषों के 28682 तथा महिलाओं के केवल 3048 लाइसेंस बने।

इसी तरह की स्थिति आगरा मंडल के मथुरा, फ़िरोज़ाबाद, और मैनपुरी के परिवहन दफ्तर में दिखाई दी। इन जिलों में भी पुरुषों के मुकाबले केवल 10 प्रतिशत महिलाओं ने ही अपने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाये हुए हैं।

हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा का कहना था कि केंद्र और राज्य सरकारें देश की महिलाओं को किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं आंकती हैं और यह उचित भी है। आज हर ऑफिस में और यहाँ तक कि सेना के तीनों विंग में महिलाओं की उपस्थिति देखी जा सकती है लेकिन इस सबके बावजूद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में काफी पीछे हैं।

शर्मा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस सम्बन्ध में प्रत्येक जिले के परिवहन विभाग के दफ्तरों में सर्वे कराएं और वाहन लाइसेंस बनवाने के लिए सख्ती की जाए तथा ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के कर्मचारी समय – समय पर लाइसेंस की चेकिंग करें। अगर किसी महिला या पुरुष पर ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो तुरंत चालान करें और वाहन सीज करें। अक्सर महिलाओं के पास लाइसेंस न मिलने पर उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है जबकि पुरुषों का चालान हो जाता है जिसके कारण महिलाएं लाइसेंस बनवाने के लिए प्रेरित नहीं होती हैं। अगर महिलाओं के भी चालान होने लगें तो उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में भी तेजी आएगी।

S Qureshi