पुलिस की नौकरी आमतौर पर एक रौबदार नौकरी मानी जाती है और आम धारणा है कि पुलिस की नौकरी में ‘ऊपर की कमाई’ भी जमकर होती है। यही कारण है कि जब भी पुलिस की भर्ती निकलती है, तो गिने – चुने पदों के लिए हज़ारों आवेदन आते हैं।

लेकिन पिछले कुछ समय में पुलिस की नौकरी से युवा वर्ग का मोहभंग होता नजर आ रहा है। बीते 20 महीनों में आगरा जिले में ही 28 पुलिसकर्मियों ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया है। आश्चर्यजनक रूप से इनमें से 15 ने अध्यापन के क्षेत्र में जाना पसंद किया है।

इसके पीछे का कारण बताते हुए एक उपनिरीक्षक ने बताया कि 24 घंटे ड्यूटी देने, कोई साप्ताहिक छुट्टी न मिलने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों की डाँट खाना पुलिस विभाग में अधीनस्थों की नियति बन चुकी है। साथ ही कभी-कभी तो सत्ताधारी लोग भी हावी हो जाते हैं और तब अधीनस्थ क्या, वरिष्ठ अधिकारी भी कुछ नहीं कह सकते।

उक्त उपनिरीक्षक का कहना था कि पुलिस विभाग में शामिल होने के लिए दौड़ लगाई, लिखित और मेडिकल परीक्षा पास की, कहीं – कहीं भर्ती के समय पैसा भी खर्च करना पड़ा, तब जाकर पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला, लेकिन वर्तमान में विभाग की स्थिति देखते हुए इस नौकरी से तौबा करने का मन करता है।

सूत्रों ने बताया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सत्ताधारियों के अधीनस्थ पुलिस स्टाफ पर हावी होने के कारण ही पिछले 20 महीनों में 28 पुलिसकर्मी नौकरी से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। एक पुलिसकर्मी के अनुसार हाल ही में सोशल मीडिया पर रिवाल्वर के साथ वीडियो बनाने वाली कांस्टेबल प्रियंका मिश्रा ने सोशल मीडिया पर ट्रोल होने और विभाग में अपने वरिष्ठों से भी अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण इस्तीफ़ा दिया है। वहीं सन 2020 में 14 सिपाही और फायरमैन भी विभाग से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। इनमें से 15 सहायक अध्यापक बन गए और एक ने सचिवालय सुरक्षा में नौकरी कर ली।

एक अन्य उपनिरीक्षक ने बताया कि पुलिस विभाग में साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था शुरू हुई थी। शुरुआत में कुछ थानों में अवकाश दिया भी गया लेकिन अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि अन्य सरकारी विभागों में साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था है।

एक महिला कांस्टेबल भावना सिंह का कहना था कि पिता की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसने उनकी सेवा के लिए छुट्टी का प्रार्थनापत्र दिया था, जो नामंजूर कर दिया गया। इससे परेशान होकर उसने इस्तीफ़ा ही दे दिया।

इसी सन्दर्भ में हेड कांस्टेबल वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके माँ और पिता दोनों बीमार रहते हैं। उनकी सेवा के लिए घर में कोई नहीं है। छुट्टी मिलना बहुत कठिन है और कभी कभी तो 24 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है।

इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज जी ने बताया कि जनवरी 2020 से अब तक 28 पुलिसकर्मियों ने विभाग से इस्तीफ़ा दे दिया है। नौकरी छोड़ने के उन्होंने कोई न कोई कारण बताये हैं। फिर भी, अगर विभाग के किसी कर्मी को कोई परेशानी है तो सीधे मुझ से मिल सकता है, उसकी परेशानी दूर करने की कोशिश होगी।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में पुलिस विभाग के अलावा हर विभाग में सत्ताधारी लोग हावी हैं। अगर नौकरी करनी है तो सत्ताधारियों को झेलना ही पड़ता है। पूर्व पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह की कार्यपद्धति की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि ओ पी सिंह का स्पष्ट आदेश रहता था कि प्रदेश पुलिस में हर फरियादी की हर स्थिति में सुनवाई हो। गलत कार्य के लिए किसी की न मानी जाए, चाहे वह सत्ताधारी पार्टी का या किसी भी अन्य पार्टी का कितना भी बड़ा पदाधिकारी क्यों न हो। ओ पी सिंह के प्रस्ताव पर ही जिलों में पुलिस कमिश्नर तैनात किये गए हैं। उसी तरह आगरा को भी पुलिस कमीश्नरी बनाये जाने की जरूरत है क्योंकि आगरा भी बहुत विस्तृत जिला है और इसका पर्यटन के क्षेत्र में अपना अलग महत्त्व है।

S Qureshi