आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में मुगल बादशाह शाहजहां के 370वें उर्स का भव्य आयोजन 26 जनवरी से शुरू हो गया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में सैकड़ों स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भाग ले रहे हैं। यह आयोजन ताजमहल की भव्यता और इतिहास को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रतीक है।
पर्यटकों के लिए विशेष सुविधा
26 और 27 जनवरी को दोपहर 2 बजे के बाद, जबकि 28 जनवरी को पूरे दिन, ताजमहल का प्रवेश पर्यटकों के लिए निशुल्क रखा गया है। इस विशेष प्रावधान के तहत पर्यटक शाहजहां और मुमताज महल की असली कब्रों का दीदार कर सकेंगे। ये कब्रें ताजमहल के तहखाने में स्थित हैं और आमतौर पर वर्षभर बंद रहती हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम
पहले दिन, 26 जनवरी को, गुस्ल की रस्म अदा की गई। इस रस्म के अंतर्गत कब्रों की विशेष सफाई की जाती है और उनके ऊपर गुलाबजल और अन्य सुगंधित पदार्थ छिड़के जाते हैं। इसके बाद फातिहा पढ़ी गई और मिलाद शरीफ का आयोजन हुआ।
दूसरे दिन, 27 जनवरी को, संदल की रस्म अदा की जाएगी। इस रस्म में शाहजहां की कब्र पर चंदन का लेप चढ़ाया जाता है, जिसे इस्लामी परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है।
आखिरी दिन, 28 जनवरी को, कुरानख्वानी, फातिहा और चादरपोशी की रस्में संपन्न होंगी। चादरपोशी के दौरान शाहजहां और मुमताज महल की कब्रों पर भव्य चादर चढ़ाई जाती है। इसके पश्चात लंगर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक एक साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे।
बढ़ी हुई पर्यटकों की संख्या और सुरक्षा प्रबंध
उर्स के दौरान ताजमहल में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। ताजमहल की सुंदरता और इस विशेष आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से आगंतुकों का आगमन हो रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने विशेष इंतजाम किए हैं। ताजमहल परिसर और उसके आसपास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है, और हर आने-जाने वाले की कड़ी निगरानी की जा रही है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
शाहजहां का उर्स हिजरी कैलेंडर के रजब माह की 25, 26 और 27 तारीख को मनाया जाता है। इस वर्ष यह आयोजन 26 से 28 जनवरी के बीच पड़ रहा है। ताजमहल न केवल प्रेम और कला का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता है। शाहजहां और मुमताज महल के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह आयोजन हर साल किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को उजागर करता है।
इस प्रकार, ताजमहल का यह उर्स न केवल ऐतिहासिक धरोहर का उत्सव है, बल्कि यह दुनिया भर में प्रेम, समर्पण और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देता है।

