आगरा के अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा आगरा CJM कोर्ट में दायरा प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ याचिका की सुनवाई एवं दोनों के बयान हेतु 15 दिसंबर की तारीख निश्चित की गयी है।
बताते चलें कि राजीव गाँधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 23 नवम्बर को आगरा CJM कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया था जिसमें कहा गया था कि अभिनेत्री कंगना रनौत ने स्वतंत्रता सेनानियों और महात्मा गाँधी के अहिंसा के सिद्धांत का उपहास उड़ाया था। देश की आजादी को भीख में मिली आजादी बताया था और प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की सरकार का गुणगान किया था।
कगंना के इस कृत्य को राष्ट्रद्रोह व स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान से जोड़ते हुए अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर के उस कथन का भी हवाला दिया था जिसमें महात्मा गाँधी के प्रति अपमानजनक बातें कही गयी थीं। प्रधानमन्त्री ने कंगना और प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाया, इस आधार पर प्रधानमन्त्री को भी इस वाद में नामित किया गया है।
इस सम्बन्ध में सामाजिक कार्यकर्त्ता विजय उपाध्याय ने रमाशंकर शर्मा अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमन्त्री का पद देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व पटल पर सम्मानित पद है। इस वाद में प्रधानमन्त्री का नाम घसीटा जाना उचित नहीं लगता। हाँ महात्मा गाँधी और देश की आजादी का भीख में मिलना बताने वाला कंगना रनौत का कथन वास्तव में स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कहा जा सकता है। उसके लिए कंगना के खिलाफ मुकदमा दायर करने की आवश्यकता समझ में आती है लेकिन प्रधानमन्त्री के पद की गरिमा का सम्मान करना हर हिन्दुस्तानी का कर्तव्य है।
इसी सन्दर्भ में कांग्रेसी नेता शब्बीर अब्बास का यह कहना भी उचित लगा कि भारत से अंग्रेजों को भगाने में देश के अनेक देशभक्तों ने सीने पर अंग्रेजों की गोलियां खाई तथा भगत सिंह जैसे लोगों ने फांसी का फंदा चूमा। देश को आजाद कराने के लिए भारतवासियों ने जो कुर्बानी दी उसे कतई भुलाया नहीं जा सकता। कंगना ने नासमझी में जो भीख में आजादी मिलने की बात कही है वह वास्तव में स्वतंत्रता सेनानियों एवं महात्मा गाँधी का अपमान है। इसलिए अधिवक्ता रमाशंकर ने जो कदम उठाया है वह ठीक है।
हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा का कहना था कि कुछ लोग माननीय प्रधानमन्त्री का नाम इस तरह के मुकदमों में घसीटकर अपना नाम हाईलाइट करना चाहते हैं जो कि उचित नहीं है। प्रधानमन्त्री के नाम को इस तरह के विवाद में लाना विदेशों में भारत की छवि धूमिल कर सकता है। वर्तमान में भारत की छवि विश्व पटल पर काफी उज्जवल है और हिन्दुस्तानियों का फ़र्ज़ बनता है कि इस छवि को धूमिल न होने दें।
सामजिक कार्यकर्ता समीर ने बताया कि 2022 में उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इस तरह के मुक़दमे मूलतः सियासी होते हैं लेकिन इनको मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। कंगना कब किसके लिए क्या बोल दें कहा नहीं जा सकता, लेकिन बिना वजह इस मुद्दे को तूल देना और उसमें प्रधानमन्त्री मोदी का नाम घसीटना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता। अब CJM की अदालत कंगना रनौत पर क्या कार्यवाही करती है यह 15 दिसंबर के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा।

