उत्तर प्रदेश में सन 2022 मं होने वाले विधानसभा चुनावों की हलचल दिन ब दिन तेज होती दिखाई दे रही है। वर्तमान भाजपा सरकार हिंदुत्व के एजेंडे पर चलते हुए चुनाव जीतकर पुनः सरकार का गठन करने की कोशिशों में लग गयी है।
अयोध्या के बाद मथुरा को भाजपा ने अपने एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया हुआ है। शायद इसी वजह से भी श्री कृष्ण जन्मस्थान प्रकरण में दावाकर्ता एवं जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने मथुरा के जिलाधिकारी के नाम एक प्रार्थनापत्र दिया है। इस पत्र में कहा गया है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद भगवन कृष्ण जन्मस्थान के गर्भगृह पर बानी हुई है। क्रूर आक्रांता औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर ईदगाह का निर्माण कराया था।
इस जमीन पर पूर्व में भी विवाद चल रहा है। इस शाही ईदगाह मस्जिद में कभी नमाज नहीं पढ़ी जाती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहाँ पर नमाज पढ़ी जा रही है। प्रतिवादीगण जानबूझकर सोहार्द्र खराब करने में लगे दिखाई दे रहे हैं। इसलिए इन्हें शाही ईदगाह मस्जिद में पांच वक्त की नमाज पढ़ने से जल्द से जल्द रोका जाए।
समिति के अध्यक्ष का कहना है की औरंगजेब ने ही मंदिर के एक हिस्से को मस्जिद में तब्दील कर दिया था जिससे उक्त मस्जिद की दीवारों पर आज भी मंदिर के अवशेष चिन्ह जैसे शंख, चक्र आदि मौजूद हैं। मुस्लिम पक्ष इन चिन्हों को मिटाने में लगा हुआ दिखाई दे रहा है। इसलिए मुस्लिमों को वहां नमाज पढ़ने से रोका जाना जरूरी है।
उधर मथुरा से सटे वृंदावन में भी हिंदुत्व के एजेंडे को हवा दी जा रही है। यहाँ के साधु – संत और महंत 6 दिसंबर को लड्डू गोपाल जी का अभिषेक करने का मन बना चुके हैं। बैठक में एक स्वर में उपस्थित लोगों ने कहा की ईदगाह पर ठाकुरजी का अभिषेक बिना किसी तोड़ – फोड़ के शान्ति से करने का निर्णय लिया गया है। ठाकुर राधा स्नेह बिहारी मंदिर के संयोजक करन कृष्ण गोस्वामी पर अभिषेक करने की जिम्मेदारी दी गयी है।
सामाजिक कार्यकर्ता दीप शर्मा का कहना था की उत्तर प्रदेश विधान सभा का शंख बजते ही हिन्दू और मुस्लिम नेता भी अपनी-अपनी बीन बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान सरकार भी दोनों वर्गों को घाव देती हुई दिखाई दे रही है लेकिन रह साम्प्रदायिकता रुपी हवा देश / प्रदेश की खुशहाली को निगल जायेगी। चुनाव आज है, कल समाप्त हो जाएगा, लेकिन यह साम्प्रदायिकता रुपी खाई खुदने के बाद पटेगी नहीं। अब तक प्रदेश में व्यापार – धंधे सभी समुदायों के भाईचारे से चलते आये हैं और अगर इन भ्रष्ट नेताओं के चुनाव जीतने के हथकंडों ने प्रदेश में सांप्रदायिक संघर्ष को हवा दे दी, तो यह आग व्यापार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगी। कोरोना की दो लहरों के बाद अब प्रदेश में व्यापार कुछ पटरी पर आता लग रहा है और ऐसे में सरकार का फ़र्ज़ बनता है कि वह सांप्रदायिक ताकतों को सख्ती से कुचले ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।

