आगरा मंडल वर्तमान में उत्तर प्रदेश की सियासी राजधानी बनता हुआ दिखाई दे रहा है। भाजपा, सपा और बसपा के आगरा और मथुरा के दिग्गज नेतागण हर पार्टी की सियासी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ माह पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने यहाँ गुप्त मीटिंग करते हुए एक सम्मलेन को भी सम्बोधित किया था।

इसी तरह सपा मुखिया अखिलेश यादव ने विगत सप्ताह आगरा मंडल के उन परिवारों के घरों पर जाकर कोविड महामारी से मारे गए अपने कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि और दुःख प्रकट करते हुए सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश की। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी पार्टी के सचिव सतीश मिश्रा को मंडल का दौरा करना कर सियासी स्थिति मालूम की। हालांकि इस सम्बन्ध में जब आगरा, मथुरा, फ़िरोज़ाबाद जिलों के आम लोग और बुद्धिजीवियों से सम्पर्क करके उनके विचार जाने गए तो सभी ने एक स्वर में इसे  केवल सियासी चाल माना। लेकिन 29 सितम्बर को लखनऊ में असदुद्दीन ओवैसी, शिवपाल सिंह यादव, चंद्रशेखर आज़ाद, और सुखदेव राजभर के बीच हुई गुप्त मीटिंग ने भाजपा और सपा को चिंता में डाल दिया है और आगरा मंडल में सियासी भूचाल ला दिया है।

सपा-बसपा के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं के अनुसार अगर यह गठबंधन होता है तो प्रदेश में भाजपा – विरोधी वोट छिन्न – भिन्न हो जायेगा और इसका सीधा नुकसान सपा और बसपा को होगा जबकि सारा फायदा भाजपा उठाएगी। वैसे शिवपाल सपा के साथ गठबंधन भी करने को बेताब दिख रहे थे लेकिन इन चारों की गुप्त बैठक ने स्थिति बदल दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आगरा मंडल के फ़िरोज़ाबाद जिले से 2 अक्टूबर को शिवपाल पैदल यात्रा और 12 अक्टूबर को सामजिक परिवर्तन यात्रा भी निकाल सकते हैं।

भाजपा के आगरा से विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने कहा की इन चारों विपक्षी नेताओं के मिलने का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा और पार्टी अब प्रदेश में 400 सीटें ही लाएगी। उन्होंने कहा कि अब सब जान चुके हैं कि यह सभी विपक्षी दल सत्ता के लालची हैं जबकि भाजपा जनता की सेवा करती है और प्रदेश का विकास करने हेतु तत्पर रहती है।

S Qureshi