आगरा के फतेहाबाद रोड क्षेत्र में हो रही बेहिसाब और पूरी तरह अनियोजित खुदाई ने शहर की यातायात व्यवस्था और पर्यटन दोनों को गंभीर संकट में डाल दिया है। यह वही इलाका है जहाँ स्मार्ट सिटी के तहत सबसे अधिक धन खर्च किए जाने के दावे किए गए थे, लेकिन आज हकीकत यह है कि फतेहाबाद रोड और उससे जुड़े आसपास के क्षेत्र शहर के सबसे बदहाल इलाकों में तब्दील हो चुके हैं। जल निगम, नमामि गंगे, मेट्रो, सीवर, बिजली और अन्य विभागों की परियोजनाओं के नाम पर लगभग पूरे क्षेत्र में एक साथ खुदाई चल रही है, वह भी पर्यटन सीजन के ठीक बीचों-बीच, जब शहर में देश-विदेश से सबसे अधिक पर्यटक आते हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत फतेहाबाद रोड के नीचे डक्ट बनाए जाने का दावा किया गया था, ताकि भविष्य में बार-बार सड़क न खोदनी पड़े। लेकिन जमीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। डक्ट निर्माण के बावजूद सड़कें फिर से खोदी गईं और कई जगह महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें दोबारा बनाया नहीं गया। नतीजा यह है कि फतेहाबाद रोड क्षेत्र में कहीं आधी सड़क बची है तो कहीं पूरी सड़क बंद पड़ी है, जिससे पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है और लोगों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में घंटों लग रहे हैं।
पुरानी मंडी से यमुना किनारा रोड पिछले छह महीने से अधिक समय से खुदी पड़ी है और फिलहाल पूरी तरह बंद है। इंदिरापुरम सौ फुटा रोड खुदाई के कारण बदहाल है। फतेहाबाद रोड से धांधूपुरा जाने वाली सड़क को हाल ही में खोद दिया गया, जिससे वहां यातायात पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बसई से होटल डबल ट्री जाने वाली सड़क एक महीने से खुदी हुई है। होटल अमर से विभव चौक जाने वाली सड़क महीनों से खुदी पड़ी है और वहां काम लगभग ठप है। शुभम गुप्ता मेट्रो स्टेशन से मुगल पुलिया तक एक लेन सड़क भी एक महीने से अधिक समय से खुदी हुई है, जिससे उस मार्ग पर हर समय लंबा जाम लगा रहता है।
इन तमाम कार्यों के ऊपर ‘कोढ़ में खाज’ की तरह मेट्रो परियोजना है, जिसने पूरे शहर की नाक में दम कर रखा है। आगरा कैंट से मेट्रो यार्ड तक बिछाई जा रही मेट्रो लाइन के कारण मॉल रोड, जिस पर पहले से ही आसपास की बंद सड़कों का पूरा दबाव था, अब अपनी आधी चौड़ाई तक सिमट चुकी है। इससे मॉल रोड पर दिन भर रेंगता हुआ ट्रैफिक आम बात हो गई है। स्कूल बसों, एंबुलेंस, पर्यटक वाहनों और स्थानीय लोगों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटन सीजन के बीच इस तरह की खुदाई ने आगरा आने वाले पर्यटकों का अनुभव भी खराब कर दिया है। ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में लगने वाला अतिरिक्त समय, धूल, गड्ढे और जाम शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। होटल, ट्रैवल एजेंट और टैक्सी चालक लगातार शिकायत कर रहे हैं कि पर्यटक जाम और अव्यवस्था से परेशान होकर नकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास के नाम पर हो रही यह अव्यवस्था दरअसल विभागों के बीच समन्वय की भारी कमी और जवाबदेही के अभाव का नतीजा है।
फतेहाबाद रोड क्षेत्र में चल रही इस अराजक खुदाई ने साफ कर दिया है कि योजनाएं कागजों पर भले ही स्मार्ट हों, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन पूरी तरह अव्यवस्थित है। यदि जल्द ही खुदाई कार्यों को चरणबद्ध ढंग से पूरा कर सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया और यातायात के वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी बनने की कीमत आखिर आगरा के आम नागरिक और पर्यटक कब तक चुकाते रहेंगे।

