चंबल के बीहड़ों से सटे बाह वन रेंज में तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है। मंगलवार को नंदगवा क्षेत्र के बीहड़ों में एक नर तेंदुए के दिखाई देने के बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया। नवीनतम जानकारी के अनुसार, यहां तेंदुओं का एक पूरा परिवार विचरण कर रहा है, जिसमें एक नर, एक मादा और उनके दो शावक शामिल हैं। इससे पहले जनवरी 2026 में बाह रेंज के आसपास दो मवेशी हमलों की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दिसंबर 2025 में एक ग्रामीण पर तेंदुए ने हमला बोल दिया था, जिसमें वह मामूली रूप से घायल हुआ। पिछले वर्ष बाह क्षेत्र में तेंदुओं के कई हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चंबल क्षेत्र में तेंदुआ जनसंख्या में 20% वृद्धि हुई है, जो मानव अतिक्रमण और शिकार की कमी से प्रेरित है। बाह रेंज में पिछले एक वर्ष में 12 तेंदुआ दर्शन दर्ज हुए हैं। वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से नंदगवा और आसपास के बीहड़ों में गश्त बढ़ा दी है। रेडियो कॉलर वाली टीमें तेंदुओं पर नजर रख रही हैं, जबकि ड्रोन से सर्वेक्षण शुरू किया गया है। रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि तेंदुए अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित हैं, लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है। विभाग ने गांवों में जागरूकता शिविर लगाए, जहां सोलर लाइटें और बाड़ाबंदी के उपकरण वितरित किए गए।
ग्रामीणों को रात में जंगल या बीहड़ की ओर न जाने, मवेशियों को खुले में न छोड़कर सुरक्षित गोशालाओं में बांधने, बच्चों और महिलाओं पर विशेष नजर रखने तथा तेंदुआ दिखने पर शोर मचाने की सलाह दी गई है। कोई जानकारी वन विभाग को तुरंत देने को कहा गया है। एक माह पहले दिसंबर में आगरा के खंदौली स्थित घड़ी सहजा में एक किसान गुड्डू पर तेंदुए ने खेत में पानी लगाते समय हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावर तेंदुआ भीड़ को देखकर पास के पातीराम डिग्री कॉलेज की चारदीवारी फांदकर अंदर घुस गया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर अन्य किसान फावड़े लेकर दौड़े, जिससे तेंदुआ भाग निकला। पुलिस ने घायल को आगरा अस्पताल भेजा, लेकिन दो घंटे तक वन विभाग की टीम न पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी।
अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं, क्योंकि तेंदुए आमतौर पर इंसानों से दूर रहते हैं। फिर भी, जलवायु परिवर्तन और वन क्षेत्र सिकुड़ने से ऐसे संघर्ष बढ़ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वन मंत्री से तेंदुओं के पुनर्वास की मांग की है। वन विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और लगातार निगरानी जारी रहेगी।

