
आगरा में बरसात ने 20 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और इसका असर दिखने लगा है। बरसाती पानी जर्जर मकानों की नींव और छतों में रिसने के कारण पूरे शहर और देहात में इमारतों के गिरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इन हादसों में मरने और घायल होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। लोगों का मानना है कि बरसात थमने के बाद अगर तेज़ धूप निकली तो बारिश में पानी सोख चुके कई पुराने और जर्जर मकान और गिर सकते हैं। गुरूवार को मकान और स्कूल की छतें गिरने के दो और हादसों में महिला सहित चार लोग घायल हो गए।
प्राप्त सूचना ेके अनुसार गुरूवार को सदर के सुल्तानपुरा में एक मकान की जर्जर छत ढह गई। मलबे में एक महिला सहित 4 लोग घायल हो गए। लोगों ने मलबे में दबे लोगों को निकाला और अस्पताल में भर्ती कराया। थाना सदर के प्रभारी निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि सुल्तानपुरा स्थित छोटी बस्ती निवासी मछला के मकान में मानिक किराये पर परिवार सहित रहते हैं। बुधवार शाम को मानिक की बहन सपना छत की सफाई कर रही थी। तभी छत ढह गई। सपना छत के साथ नीचे आ गिरी। मलबे में मानिक की पत्नी गीता, पाँच साल का बेटा शिव, बहन श्यामवती भी दब गई। घायल गीता की हालत गंभीर है।
उधर आगरा ज़िले के बरौली अहीर में प्राथमिक विद्यालय करथला की छत का एक हिस्सा बुधवार को भरभरा कर गिर पड़ा। गनीमत रही कि हादसा रात में हुआ। सुबह छत गिरी देख प्रधान अध्यापक ने दूसरे स्कूल में कक्षाएं संचालित कराई हैं। क्षेत्रीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग करने का आरोप लगाते हुए बीएसए से शिकायत की है।
लोगों ने स्कूल के निर्माण में धांधली का आरोप लगाते हुए बीएसए को पत्र लिखा है। निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान की लापरवाही बताई है। पत्र में लिखा है कि एक साल पूर्व ही स्कूल की मरम्मत कराई गई है। निर्माण के वक्त भी इसमें घटिया सामग्री लगाई गई थी, तब तत्कालीन बीएसए से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बीएसए जितेंद्र गौड़ का कहना है कि स्कूलों को निर्देश पूर्व में ही दिए जा चुके हैं, जर्जर भवन वाले विद्यालयों को आसपास के स्कूलों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जा रही है। प्रधान अध्यापकों को बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कक्षा संचालित करने को कहा गया है।


